[Hindi] इसरो ने उपग्रह प्रक्षेपण में रचा इतिहास

ISROइसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 7 देशों के 104 सैटलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजकर उपग्रह प्रक्षेपण के विज्ञान की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। भारत ने इसके साथ ही एक बार में सबसे अधिक उपग्रह अन्तरिक्ष में स्थापित करने के रूस के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल करने वाले इसरो ने पहली बार एक रॉकेट के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में सैटलाइट्स लॉन्च किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो की इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी है।

इस मामले में अब तक आगे रहे रूस ने एक बार में 37 सैटलाइट्स अंतरिक्ष में भेज थे। इसरो ने इससे पहले पिछले वर्ष जून में 20 सैटलाइट्स लॉन्च किए थे, लेकिन अमेरिका और रूस ने इस आंकड़े को कई बार पार किया। इस बार भी इसरो ने पीएसएलवी के शक्तिशाली एक्स-एल वर्जन के रॉकेट का इस्तेमाल किया था। मंगलयान और चंद्रयान मिशन में भी इसी रॉकेट का उपयोग किया गया था।

इस अभियान में भेजे गए 104 उपग्रहों में से तीन भारत के हैं। जबकि बाक़ी के 101 सैटेलाइट्स इसराइल, कज़ाख़्स्तान, नीदरलैंड, स्विटज़रलैंड और अमरीका के हैं। इस अभियान के बारे में इसरो के चेयरमैन एएस किरण कुमार ने मीडिया को बताया कि 3 भारतीय उपग्रहों में से एक का वजन 730 किग्रा है, जबकि बाक़ी दो का वजन 19-19 किग्रा है। इनके अलावा हमारे पास 600 किग्रा और वजन भेजने की क्षमता थी, इसलिए हमने 101 दूसरे सैटेलाइटों को भी लाँच करने का फ़ैसला लिया।

पिछले कुछ सालों में अंतरिक्ष प्रक्षेपण के मामले में दुनिया भर में भारत की एक अलग छवि बनी है। जिससे दुनिया के कई देश अन्तरिक्ष में अपना उपग्रह भेजने के लिए भारत के अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन की सेवाएँ ले रहे हैं। भारत ने विगत कुछ वर्षों में दुनिया के 21 देशों के 79 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए हैं। इनमें गूगल और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियों के उपग्रह भी शामिल हैं।

प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी 37 रॉकेट ने सबसे पहले भारत के कार्टोसेट-2 शृंखला के उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया, जिससे भारतीय भू-भाग की हाई रेजोल्यूशन इमेज प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके बाद 103 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी से करीब 520 किलोमीटर दूर ध्रुवीय सन सिंक्रोनस ऑर्बिट में प्रक्षेपित किया गया।

हालांकि इतनी संख्या में और इतने वज़न के साथ सभी उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण आसान नहीं था। लेकिन ऐसा इसलिए संभव हो सका क्योंकि भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन पहले से ही एक बार में कई उपग्रह छोडने की महारथ हासिल कर चुका है। प्रक्षेपित किए गए सभी उपग्रहों का वजन करीब 1378 किलोग्राम था।

Image credit: Downtoearth.org.in

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