Monsoon 2026 June Update: जून में 101% बारिश के संकेत, केरल से बिहार तक खरीफ फसलों को फायदा
मुख्य मौसम बिंदु
- जून में 101% LPA के साथ सामान्य बारिश की संभावना
- पश्चिमी घाट और उत्तर भारत में बेहतर वर्षा के संकेत
- मध्य और पूर्वी भारत में कम बारिश की आशंका
- खेती और जल संसाधनों पर क्षेत्रीय असर संभव
मानसून 2026 की शुरुआत जून महीने में संतुलित और सामान्य रहने की उम्मीद है। मानसून पूर्वानुमान के अनुसार जून में कुल बारिश लगभग 101% (LPA) रहने की संभावना है। यहां LPA (Long Period Average) का मतलब है लंबे समय की औसत बारिश, जो जून के लिए 165.3 मिमी मानी जाती है।
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संभावनाओं के अनुसार जून में 70% संभावना सामान्य बारिश, 10% संभावना सामान्य से ज्यादा बारिश और 20% संभावना सामान्य से कम बारिश की है। इसका साफ मतलब है कि मानसून की शुरुआत मजबूत रहेगी, लेकिन सभी क्षेत्रों में समान रूप से बारिश नहीं होगी। इस दौरान अल-नीनो (El Niño) का असर सीमित रहेगा, जिससे मानसून समय पर आगे बढ़ सकता है और शुरुआती बारिश खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाएगी।
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कहां होगी ज्यादा बारिश?
जून के दौरान पश्चिमी घाट के इलाके जैसे कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में सामान्य से बेहतर बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा इंडो-गंगेटिक मैदान (पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्से) में भी अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इन क्षेत्रों में समय पर अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई आसान होगी और किसानों को शुरुआती राहत मिलेगी।
कहां कम होगी बारिश?
मानचित्र के अनुसार पूर्वी और मध्य भारत के हिस्सों में जून के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इसमें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के कुछ इलाके शामिल हैं। इसके अलावा पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों खासकर गुजरात के आसपास, कमजोर मानसूनी गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी खेती और जल संसाधनों के लिए चिंता का कारण बन सकती है।

किन राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं?
हालांकि जून में बड़े स्तर पर सूखे की संभावना नहीं है, लेकिन जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी रहेगी, वहां स्थानीय स्तर पर सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अगर बारिश सामान्य से कम रहती है, तो किसानों को शुरुआती फसल चक्र में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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किन फसलों पर पड़ेगा असर?
जून खरीफ सीजन की शुरुआत का सबसे अहम महीना होता है, इसलिए बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ता है। जहां अच्छी बारिश होगी, वहां धान (Rice) की बुवाई समय पर हो सकेगी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद रहेगी। वहीं मध्य भारत में बारिश की कमी होने पर सोयाबीन और कपास (Cotton) की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इसी तरह मक्का और दालें (Maize & Pulses) भी उन क्षेत्रों में प्रभावित हो सकती हैं, जहां बारिश की कमी रहेगी।
किसानों के लिए क्या संकेत हैं?
जून में सामान्य बारिश की संभावना को देखते हुए किसान खरीफ फसलों की बुवाई समय पर शुरू कर सकते हैं। हालांकि जिन क्षेत्रों में कम बारिश का अनुमान है, वहां सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था और पानी के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर जून 2026 में मानसून की शुरुआत सकारात्मक और संतुलित दिख रही है, लेकिन इसका वितरण असमान रहेगा। जहां पश्चिमी घाट और उत्तरी मैदानों में अच्छी बारिश से राहत मिलेगी, वहीं पूर्वी और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में कमी चिंता बढ़ा सकती है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि मानसून की शुरुआत भले ही मजबूत हो, लेकिन इसकी असमानता आने वाले महीनों के लिए संकेत दे रही है।
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