बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम,जोरदार मानसून की स्थिति, ओडिशा से गुजरात तक मूसलाधार बारिश

By: Skymet team | Edited By:
Aug 13, 2025, 2:30 PM
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बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम, प्रतीकात्मक फोटो

बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में लगातार बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के असर से कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बन गया है। यह सिस्टम ऊपरी स्तर तक फैला हुआ है और ऊंचाई पर दक्षिण-पश्चिम की ओर झुका हुआ है। जल्द ही यह अच्छी तरह से चिन्हित लो-प्रेशर में तब्दील होगा। इसके बाद यह धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण तटीय ओडिशा से गुजरेगा। यह सिस्टम अगले 3-4 दिन तटीय राज्यों के ऊपर ही मंडराता रहेगा।

मानसून ट्रफ और बारिश का असर

एक पूर्व-पश्चिम दिशा में ट्रफ लाइन कम दबाव के केंद्र से होते हुए उत्तर मध्य महाराष्ट्र तक फैली है, जो उत्तर तटीय आंध्र, तेलंगाना और विदर्भ से होकर गुजर रही है। इस ट्रफ के दोनों ओर बारिश की गतिविधियां तेज़ होंगी। अगले 3-4 दिनों में देश के पूर्वी, मध्य और पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय से प्रबल मानसून का असर देखने को मिलेगा, हालांकि यह अलग-अलग चरणों में होगा।

कहाँ और कब होगी भारी बारिश?

आज: दक्षिण ओडिशा, उत्तर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दक्षिण छत्तीसगढ़ में भारी बारिश के आसार।

कल और परसों: बारिश का दायरा बढ़कर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र तक फैलेगा।

16-17 अगस्त: राजस्थान और गुजरात के बाहरी हिस्सों तक असर पहुंचेगा।

एक और सिस्टम तैयार

इसी बीच 16 अगस्त को म्यांमार के गल्प ऑफ मार्टबान से एक और मौसम प्रणाली बंगाल की खाड़ी में दाखिल होगी। 17 अगस्त तक यह मज़बूत होकर डिप्रेशन बन सकती है। यह नया सिस्टम पहले से मौजूद लो-प्रेशर को अपने में समेटकर बंगाल की खाड़ी में एक शक्तिशाली मानसून सिस्टम का रूप लेगा।

मानसून ब्रेक का अंत

मौसम मॉडल के मुताबिक, ब्रेक-मानसून की स्थिति अब खत्म हो गई है और मानसून की वापसी पूरे जोरों पर है। अगले एक हफ़्ते तक ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा और गुजरात में भारी बारिश के साथ स्थानीय बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका है। अगले हफ्ते की शुरुआत में बारिश का दौर और तेज होगा। लोगों को सतर्क रहने की सलाह है।

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Skymet team

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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