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[Hindi] रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बाद अब ऑस्ट्रेलिया भीषण बाढ़ की चपेट में; 20 हज़ार घर डूबने की कगार पर

[Hindi] रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बाद अब ऑस्ट्रेलिया भीषण बाढ़ की चपेट में; 20 हज़ार घर डूबने की कगार पर

02:40 PM

Australia Floods

ऑस्ट्रेलिया भीषण गर्मी से जूझने के बाद अब विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आ गया है। यहाँ तक देश का उत्तर-पूर्वी हिस्सा जलमग्न हो चुका है। इस बाढ़ ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि जानवरों को भी अपने चपेट में ले लिया है। परिणामस्वरूप, पानी के बहाव से मगरमच्छ भी सड़कों पर आ गए हैं। मौसम विशेषज्ञों का दावा हैं, कि यह बाढ़ अब तक कि सबसे विनाशकारी बाढ़ है और बारिश ऐसी ही चलती रही तो लगभग 20 हज़ार घर डूब सकते हैं।

फिलहाल वर्तमान स्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है, कि यह बारिश जल्द रुकने का नाम नहीं लेगी। इंघम शहर में सोमवार को 10 सेंटीमीटर से ज़्यादा वर्षा रिकॉर्ड कि गई। मौसम विभाग के अनुसार यदि बारिश ऐसी ही चलती रही तो साल भर की बारिश एक हफ्ते में ही रिकॉर्ड कि जाएगी और इतने सालों में हुई बारिश के सारे रिकॉर्ड टूट जाएंगे।

खराब स्थितियों के मद्देनजर सेना को सतर्क कर दिया गया है। लोगों के बचाव के लिए विभिन्न तैयारियाँ की जा रही हैं। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विद्यालय, दफ्तर यहाँ तक ही हवाई अड्डे भी बंद कर दिये गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया पर बने हुए सिस्टम, रिकॉर्ड हुई बारिश और रेडार इमेज पर एक नज़र-

Low pressure area in Australia

Capture radar AustraliaAustralia weather

Image Credit: BOM Australian Govt, CNN International

रिपोर्ट्स के अनुसार क्वीन्सलैंड और आसपास के इलाकों में अभी भी 400 से ज़्यादा लोग अपने घरों कि छतों पर फँसे फसे हुए हैं। पानी के बहाव ने कई लोगों को घर से बेघर कर दिया है।

इस बाढ़ का मुख्य कारण है उत्तर-पश्चिमी क्वीन्सलैंड पर बना हुआ कम दबाव का क्षेत्र। साथ ही एक ट्रफ रेखा कम दबाव वाले क्षेत्र में मिल रही है। इन मौसमी सिस्टम्स के कारण अगले 24 घंटों तक भारी वर्षा होने की संभावना है। साथ ही तेज़ गति से हवाएँ भी चलती रहेंगी।

अनुमान है कि 6 फरवरी तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। 7 फरवरी को कम दबाव का क्षेत्र क्वीन्सलैंड के तटीय इलाकों की तरफ बढ़ जाएगा। कम दबाव के क्षेत्र के साथ ट्रफ रेखा भी दक्षिण-पूर्वी दिशा में आगे बढ़ जाएगी जिससे उम्मीद है कि 8 फरवरीतक बारिश का ज़ोर कम हो जाएगा और स्थितियाँ सुधरने लगेगी।

कृपया ध्यान दें: स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभार: skymetweather.com अवश्य लिखें।