पश्चिमी विक्षोभ की दस्तक से भीगेंगी हिमालय की वादियाँ, 24-25 अप्रैल को बारिश के आसार
पश्चिमी विक्षोभ एक महत्वपूर्ण मौसम प्रणाली है, जो खासतौर पर भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों को प्रभावित करती है। ये सिस्टम भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठते हैं और पूर्व की ओर बढ़ते हैं। इनके साथ नमी युक्त हवाएं आती हैं, जो उत्तर भारत में बादल, बारिश और तापमान में गिरावट लाती हैं, खासतौर पर सर्दी और शुरुआती वसंत के समय।
नया पश्चिमी विक्षोभ, बारिश से भीगेगी वादियाँ
एक ताज़ा पश्चिमी विक्षोभ 24 अप्रैल को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में दस्तक देने वाला है। इसके प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गिलगित-बाल्टिस्तान व मुज़फ़्फराबाद जैसे क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद है। 24 और 25 अप्रैल को श्रीनगर, पहलगाम, रोहतांग पास, मनाली, कुल्लू, धर्मशाला, मंडी, चंबा और शिमला जैसे पर्यटन स्थलों के साथ-साथ बद्रीनाथ, केदारनाथ, नैनीताल और मसूरी में मध्यम बारिश हो सकती है। यह बारिश इन जगहों की खूबसूरती में चार चाँद लगा देगी और तापमान में भी हल्की गिरावट ला सकती है।
26 अप्रैल से साफ़ होने लगेगा मौसम
26 अप्रैल के बाद मौसम में सुधार की संभावना है। हालांकि ऊँचाई वाले कुछ हिस्सों में हल्की बारिश रह सकती है, लेकिन अधिकतर जगहों पर बादल छटने लगेंगे और धूप निकलने लगेगी। 25 अप्रैल के बाद कोई खास पश्चिमी विक्षोभ नहीं दिख रहा है। इसका मतलब है कि 26 अप्रैल से लेकर लगभग 3-4 मई तक मौसम साफ़ और शुष्क रहेगा। इस दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में धूप और सुहावने तापमान के कारण पर्यटन के लिए बेहतरीन मौका होगा।
अप्रैल के अंत में सुहाना मौसम
हालांकि 24–25 अप्रैल को कुछ बारिश हो सकती है, लेकिन उसके बाद मौसम साफ और स्थिर रहेगा। यह समय उत्तर भारत की पहाड़ियों में घूमने, तीर्थ यात्रा करने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए एकदम सही है।

