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[Hindi] पेरिस जलवायु समझौते को अमली जमा पहनाने के लिए पोलैंड में जुटे दुनियाभर के देश; अमरीका अब भी अड़ा

[Hindi] पेरिस जलवायु समझौते को अमली जमा पहनाने के लिए पोलैंड में जुटे दुनियाभर के देश; अमरीका अब भी अड़ा

03:27 PM

जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती संख्या जैसे कई मुद्दे हैं जिन पर दुनिया भर के देश चिंतित हैं और इन मुद्दों को हल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे वैश्विक संस्थान प्रयासरत भी हैं। पृथ्वी को बचाने के उद्देश्य से 2015 में पेरिस समझौता हुआ था जिससे उम्मीद जगी थी कि दुनिया के सभी देश गंभीर कदम उठाएंगे। लेकिन अमरीका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने पेरिस जलवायु समझौते से पीछे हटने का फैसला कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उनके इस कदम से दुनिया भर में फिर से चिंता बढ़ गई थी।

इस बीच एक बार फिर से दुनिया भर के कई देश पेरिस समझौते में बनी सहमति को अमल में लाने के लिए एकजुट हुए हैं। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्‍त राष्‍ट्र कन्‍वेशन के भागीदार देशों की 24वीं बैठक 2 दिसम्बर से पोलैंड के कोतोवित्‍स में शुरू हुई। यह सम्‍मेलन 14 दिसम्‍बर तक चलेगा, जिसमें सभी देश पेरिस समझौते को लागू करने पर चर्चा करेंगे।

 Climate summit in Poland in-News UN 600

सम्‍मेलन में भारत का प्रतिनिधित्‍व केन्‍द्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन कर रहे हैं। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई है कि सम्‍मेलन में पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के बारे में आवश्‍यक दिशा-निर्देंश मूर्त रूप से लकेंगे। उन्‍होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि सम्‍मेलन में लिए गये फैसले पेरिस समझौते की व्‍यवस्‍थाओं और सिद्धांतों के अनुरूप हों। सम्‍मेलन के अवसर पर भारत अलग से एक पवेलियन बना रहा है जिसमें जलवायु परिवर्तन के संबंध में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। इस पवेलियन का विषय है - वन वर्ल्‍ड, वन सन, वन ग्रिड।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर भारत और फ्रांस ने पेरिस में 30 नवंबर 2015 को एक अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन यानि इंटरनैशनल सोलर अलायंस का गठन किया था। यह संगठन सौर ऊर्जा पर आधारित 121 देशों का एक सहयोग संगठन है। यह संगठन कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित देशों को एक मंच पर लाएगा। ऐसे देशों में सूर्य की किरणे अधिक समय तक रहती हैं जिससे बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का उत्पादन हो सकता है।

अमरीका को छोड़कर, जलवायु परिवर्तन संबंधी पेरिस समझौते पर, दस्‍तखत करने वाले जी-20 के अन्‍य सभी सदस्य देशों ने इस समझौते को पूरी तरह अमल में लाये जाने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किया है। जबकि अमरीका ने फिर कहा है कि वह इस समझौते में शामिल नहीं होगा।

पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति आगाह करते हुए लगभग दो सौ देशों के प्रतिनिधि 2 दिसम्बर से पोलैंड में संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु सम्‍मेलन के लिए एकजुट हो रहे हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के दुष्‍परिणामों को रोकने की योजना को ठोस रूप दिया जा सके।

जलवायु परिवर्तन के सबसे ज्‍यादा दुष्प्रभाव झेल रहे छोटे और गरीब देश चाहते हैं कि अमीर देश 2015 के पेरिस समझौते में किए गए वायदों को पूरा करें। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में महज एक डिग्री की बढ़ोतरी के बावजूद जंगलों में भीषण आग लगने, लू चलने और समुद्री तूफान जैसी विनाशकारी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो समूचे विश्व के लिए चुनौती और चिंता का कारण है।

Image credit: NewsUN

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