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[Hindi] अरब सागर में इस साइक्लोन सीज़न का पहला तूफान हो सकता है विकसित, केरल और तमिलनाडु में हो रही है ज़बरदस्त बारिश

November 19, 2020 12:40 AM |

देश के मुख्य मॉनसून सीजन यानी दक्षिण पश्चिम मॉनसून के बाद का पहला डिप्रेशन अरब सागर में किसी भी समय विकसित हो सकता है। दक्षिण पूर्वी अरब सागर और इससे सटे लक्षद्वीप क्षेत्र पर एक निम्न दबाव का सिस्टम बना हुआ है जो जल्द ही और प्रभावी होते हुए डिप्रेशन में तब्दील हो जाएगा। समुद्री स्थितियां और वायुमंडलीय स्थितियां इसे लगातार मदद कर रही हैं जिसके कारण इसके प्रभावी होकर डिप्रेशन बनने की पूरी संभावना है। देश के मुख्य मॉनसून के बाद 1 अक्टूबर से दिसंबर के आखिर तक भारत के दोनों समुद्री क्षेत्रों में चक्रवाती तूफान विकसित होने की संभावना रहती है। इसी कारण इस समय को साइक्लोन सीजन की कहा जाता है और जो सिस्टम डिप्रेशन बनने जा रहा है संभावना है कि अरब सागर के मध्य भागों या उससे सटे पश्चिमी भागों पर पहुंचने के बाद यह चक्रवाती तूफान का रूप भी ले सकता है।

English Version: Monsoon depression to form in the Arabian sea shortly, rain to intensify further over Kerala and Tamil Nadu

दक्षिण पूर्वी अरब सागर पर बने निम्न दबाव को एक चक्रवाती हवाओं का सपोर्ट मिल रहा था जिसके कारण केरल और तमिलनाडु में हाल के समय में मूसलाधार वर्षा रिकॉर्ड की गई। अलपुझा, कोडईकनाल, तिरुअनंतपुरम, कोची, कन्याकुमारी समेत कई शहरों में भीषण बारिश हुई है। आगामी 24 घंटों के दौरान इन दोनों राज्यों के कई इलाकों में इसी तरह से मूसलाधार वर्षा जारी रहने की संभावना है। उसके बाद 23 नवंबर से गतिविधियां कुछ कम हो जाएंगी।

दक्षिण पश्चिम मॉनसून के बाद अरब सागर में पहला संभावित चक्रवाती तूफान पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी दिशा में लगातार बढ़ता रहेगा। इसके पश्चिमी दिशा में जाने के कारण अरब सागर की पूरी एनर्जी इसके इर्द-गिर्द रहेगी और केरल समेत भारत के तट पर चल रही आर्द्र हवाओं को यह अपनी तरफ खींच ले जाएगा जिसके कारण 21 नवंबर से केरल समेत दक्षिणी प्रायद्वीप भारत में बारिश की गतिविधियां कुछ समय के लिए कम हो जाएंगी। अगर चक्रवाती तूफान अरब सागर में विकसित होता है तो यह यमन या ओमान की तरफ जाएगा और भारत के तटों को इससे खतरा नहीं होगा। 21 से 23 नवंबर के बीच केरल में बारिश काफी कम हो जाएगी। लेकिन बारिश का अगला स्पैल 23 नवंबर से शुरू होगा क्योंकि बंगाल की खाड़ी के मध्य और दक्षिण पूर्वी भागों पर एक नया मौसमी सिस्टम उभरता हुआ नजर आ रहा है जो धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा और मिनी मॉनसून को दक्षिण भारत पर फिर से सक्रिय कर देगा।

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