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[Hindi] जतिन सिंह, एमडी स्काइमेट: इस सप्ताह उत्तर भारत से लेकर महाराष्ट्र समेत मध्य भारत और दक्षिण के कई राज्यों में भारी बारिश और ओला वृष्टि का ख़तरा

January 4, 2021 3:50 PM |

पोस्ट मॉनसून सीजन (1 अक्टूबर से 31 दिसंबर, 2020) में देश के विभिन्न भागों में बारिश का मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में क्रमशः 39% और 15% की कमी रही जबकि मध्य क्षेत्र और दक्षिणी प्रायद्वीप में सामान्य से 12% और 15% अधिक वर्षा दर्ज की गई। समग्र भारत में 123.8 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले 124.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 1% अधिक है। इसके अलावा उत्तर-पूर्वी मॉनसून इस बार काफी अच्छा रहा। तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक समेत दक्षिण भारत के 5 सब डिवीजनों में से 4 में सामान्य से अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला जबकि केरल में 26% कम वर्षा दर्ज की गई।

वर्ष 2020 एक ऐसा वर्ष जिसमें चुनौतियाँ बहुमुखी थीं। अर्थव्यवस्था के लिए यह साल हाल के वर्षों में सबसे चुनौतीपूर्ण था। कोविड महामारी के चलते लगे देश व्यापी लॉक डाउन के कारण व्यापार तबाह हुए, नौकरियाँ गईं और विनिर्माण क्षेत्र को बड़ी चोट पहुंची। घातक वायरस ने देश ही नहीं पूरी दुनिया के सामने आपातकाल की स्थिति लाकर रख दी और इसके चलते 21 वीं सदी में 1.84 मिलियन लोगों की जान चली गई। कोविड महामारी को 2020 की सबसे विनाशक घटना के रूप में इतिहास में जगह मिलेगी, जिसने समूची मानवता के समक्ष संकट पैदा किया। तबाही अभी खत्म नहीं हुई है, और इसका प्रभाव 2021 में भी देखने को मिलेगा। समूचे विश्व में टीकाकरण से इसे समाप्त करने के प्रयास में भी कुछ वर्षों का समय लग सकता है। 

कोविड के चलते अर्थ व्यवस्था के सामने पैदा हुए संकट के बीच रबी और खरीफ 2020 के दौरान अच्छी बारिश की वजह से अर्थवयवस्था को गति मिलने की उम्मीद पैदा होती। वर्ष के दौरान रिकॉर्ड उत्पादन ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है। महामारी को ध्यान में रखते हुए लगाए गए लॉकडाउन के कारण आशंका पैदा हो गई थी कृषि भी इससे प्रभावित होगा और पर्याप्त श्रमिक बल न उपलब्ध होने के कारण देश में खाद्यान्न उत्पादन में व्यापक कमी आ सकती है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अच्छे उत्पादन से न सिर्फ अर्थव्यवस्था को संबल मिला बल्कि खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई।  

इस बीच समूचा विश्व जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का सामना किसी न किसी रूप में कर रहा है। जलवायु परिवर्तन को को रोकने के सख्त उपाय एक बड़ी चुनौती हैं। औद्योगिक क्रांति के बाद से औसत तापमान में 1 डिग्री की वृद्धि हुई है। 2020 शीर्ष 5 सबसे गर्म वर्षों में जगह पाने जा रहा है। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए वर्ष 2020 प्रदूषण के संदर्भ में कुछ राहत भरा रहा। हाल के एक दशक में इस 2020-21 की सर्दियों के मौसम के दौरान वायु प्रदूषण में कमी रही। दिल्ली में साल 2020 की सर्दियों में 192 दिन ऐसे थे जब पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 60 mcg/m3 से नीचे रहा।

इस बीच उत्तर भारत के राज्यों में इस साल ज़बरदस्त सर्दी पड़ी। स्काइमेट ने मॉनसून 2020 के बाद ही 2020-21 की सर्दियों के लिए जारी अपने अनुमान में कड़ाके की ठंड का अनुमान भी व्यक्त किया था। पिछले सप्ताहांत पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई जिससे समूचा पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र बर्फ की चादर से ढंका हुआ दिखाई दे रहा है। मैदानी इलाकों में भी भारी बारिश दर्ज की गई। 

उत्तर भारत

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछले सप्ताह के आखिरी दिनों की तरह ही इस सप्ताह के शुरुआती दिनों में यानि 4-5 जनवरी को व्यापक रूप से वर्षा होने की संभावना है। पर्वतीय राज्यों में भी बारिश और बर्फबारी का लंबा स्पैल अपेक्षित है। अनुमान है कि पर्वतीय राज्यों में 8 जनवरी तक कई जगहों पर मध्यम से भारी बारिश और हिमपात होगा। कुछ भागों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे रहने वाला है, जिससे कोल्ड दे कंडीशन की अपेक्षा भी है। मैदानी इलाकों में सप्ताह के आखिर में शीतलहर की वापसी हो सकती है जब न्यूनतम तापमान औसत से नीचे चला जाएगा।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत

समूचे क्षेत्र में इस सप्ताह भी किसी महत्वपूर्ण मौसमी गतिविधि की संभावना नहीं है। बिहार और उत्तरी बंगाल के अधिकांश हिस्सों में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। बागडोगरा, गौहाटी, इम्फाल, आइजोल, अगरतला, जोरहाट और मोहनबाड़ी के लिए घने कोहरे की संभावना है।

वाराणसी, प्रयागराज, पटना, रांची, धनबाद, कोलकाता समेत पूर्वी भारत के शहरों में सामान्य सर्दी के साफ़ मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इन भागों में भी कुछ स्थानों पर मध्यम से घना कोहरा छा सकता है।

मध्य भारत

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कोई भी मौसमी हलचल अपेक्षित नहीं है। मध्य महाराष्ट्र और कोंकण के उत्तरी भागों में 6 से 8 जनवरी के बीच बेमौसम बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश के भी दक्षिणी भागों यानि महाराष्ट्र की सीमाओं से सटे क्षेत्रों में 9-10 जनवरी को वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। 

दक्षिण प्रायद्वीप

हालांकि पूर्वोत्तर मॉनसून 31 दिसंबर को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है, लेकिन तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश को छोड़कर दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के बाकी हिस्सों में इस सप्ताह भी काफी अच्छी वर्षा देखने को मिल सकती है। तमिलनाडु और केरल में मुख्यतः भारी वर्षा होने के आसार है।

दिल्ली-एनसीआर

दिल्ली और एनसीआर में 4 और 5 जनवरी को भी कुछ क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि जारी रहने की संभावना है। सप्ताहांत की गतिविधि के दौरान 19.3 मिमी की सामान्य मासिक वर्षा पहले ही प्राप्त हो चुकी है और इस महीने के दौरान बड़े अंतर से अधिक होने की संभावना है। दिल्ली में 6 जनवरी तक सुबह और रात के समय कड़ाके की सर्दी से लोगों को राहत मिलती रहेगी क्योंकि इस दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा जबकि दिन में बादल छाए रहने और बारिश तथा ओलावृष्टि होने की संभावना के बीच अधिकतम तापमान में कमी रहने के आसार हैं। सप्ताह के आखिर में फिर से तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।

चेन्नई

चेन्नई में भी काफी अच्छी वर्षा होने की संभावना इस सप्ताह है। अनुमान है कि 5 और 6 जनवरी को चेन्नई में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जाएगी। दक्षिण भारत के इस महानगर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जाएगा।

दिल्ली प्रदूषण

दिल्ली एनसीआर में पिछले सप्ताह प्रदूषण में कुछ वृद्धि दर्ज की गई थी और यह बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया था लेकिन सप्ताह के आखिरी दिनों में हुई बारिश के चलते प्रदूषण में कमी आई है और वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहतर हुआ है। 4 से 6 जनवरी के बीच दिल्ली में फिर से बारिश की गतिविधियां बनी रहेगी जिसकी वजह से प्रदूषण के कण साफ हो जाएंगे और वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।

कुल मिलाकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता बीते सप्ताह के मुकाबले बेहतर रहने की संभावना है।

Image credit: Business Line

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