[Hindi] जतिन सिंह, एमडी, स्काइमेट: 15 जुलाई के बाद मॉनसून फिर ले सकता है ब्रेक, जून में कमजोर मॉनसून के कारण दलहन फसलों की बुआई में आई भारी कमी

July 8, 2019 5:25 PM |

Monsoon 2019 rains in Pudducheri

भारत में साल 2019 के मॉनसून का पहला महीना जून काफी कमजोर रहा और पूरे देश में सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई। स्काइमेट ने देश के अलग-अलग भागों में जून में जिस तरह की बारिश की संभावनाएं जताई थीं वैसी ही वर्षा रिकॉर्ड की गई है। 1 जून से 30 जून तक पूरे भारत में बारिश सामान्य से 33% कम हुई। हालांकि जून के आखिरी समय में कुछ इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई जिसकी वजह से आंकड़ा 33% पर पहुंचा। इससे पहले यानी 25 जून से पहले देश में बारिश में कमी का आंकड़ा बहुत अधिक था।

अब मध्य भारत में बारिश में कमी आएगी जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश सहित गंगा के मैदानी इलाकों और हिमालय की तराई क्षेत्रों में व्यापक बारिश होगी। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी अच्छी बारिश होगी। पूर्वोत्तर राज्यों पर भी

मुंबई में सप्ताह के मध्य से बारिश में आएगी कमी

मुंबई में बारिश में अब कमी आएगी। मुंबई में जून के आखिर में खासकर 28 जून से लेकर 3 जुलाई तक भीषण बारिश रिकॉर्ड की गई, जिसकी वजह से कई इलाके जलमग्न हो गए। 8 जुलाई को मध्य रात्रि से दोपहर के बीच मूसलाधार बारिश दर्ज की गई। अब मुंबई में बारिश में कमी आने की संभावना है। हालांकि 10 जुलाई तक देश की आर्थिक राजधानी में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी। 11 जुलाई से बारिश में और कमी आ जाएगी।

मुंबई में जुलाई में 606 मिलीमीटर बारिश पहले ही हो चुकी है जो पूरे महीने में होने वाली 840.7 मिलीमीटर वर्षा से कुछ ही कम है। अनुमान है कि अगले कुछ ही दिनों में पूरे जुलाई में होने बारिश के आंकड़ों तक वर्षा का स्तर पहुँच जाएगा। लेकिन इससे बहुत ऊपर नहीं पहुंचेगा क्योंकि जून के आखिर से जुलाई के पहले सप्ताह के बीच जिस तरह की बारिश हुई है वैसी वर्षा 10 जुलाई के बाद नहीं दिखेगी।

Also read in English: MD SKYMET, JATIN SINGH: BREAK MONSOON CONDITIONS AFTER JULY 15. POOR MONSOON RAINS IN JUNE IMPACT SOWING OF PULSES SEVERELY.

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ की आशंका

दूसरी तरफ देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में इस सप्ताह मॉनसून जमकर बरसेगा। जिसके कारण उत्तर प्रदेश, बिहार और असम जैसे कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती हैं। उत्तर प्रदेश में रामपुर, लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, गोंडा और बाराबंकी में नदियां उफान पर होंगी कई इलाके जलमग्न हो सकते हैं। कई इलाकों पर डूब का खतरा हो सकता है। बिहार में भी इस सप्ताह कई इलाकों में भीषण बारिश की संभावना है जिसके कारण पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, मधुबनी, खगड़िया, और सुपौल में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

इसी दौरान पूर्वोत्तर में असम भी मूसलाधार मॉनसून वर्षा की चपेट में होगा और राज्य के कई इलाके जोरहाट, गोलाघाट, धेमाजी, करीमगंज और सोनितपुर सहित कई जिले बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। मूसलाधार वर्षा की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार और असम में राहत और बचाव दलों को अभी से सतर्क हो जाने की आवश्यकता है। नागरिकों को भी एहतियात बरतने की जरूरत है।

जून में कमजोर मॉनसून से दलहन फसलों की बुआई में भारी कमी

भारत में खरीफ फसल बड़े पैमाने पर मॉनसून वर्षा पर निर्भर है, ऐसे में इस बार कम बारिश के कारण कृषि क्षेत्र और किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। दालों सहित तमाम खरीफ फसलों की बुआई पिछड़ गई है। आंकड़ों में अगर देखें तो बीते साल के मुकाबले इस बार दालों की बुआई 79% कम हुई है। 5 जुलाई तक पूरे देश में कुल 7.9 हेक्टेयर में दाल की बुआई हुई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 27.91 एक लाख थी।

बुआई देश के लगभग सभी राज्यों में पिछड़ी है। राजस्थान देश का सबसे बड़ा दाल उत्पादक है। यहाँ हर वर्ष लगभग 28.85 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई होती है। लेकिन राज्य में अब तक महज 2.285 लाख हेक्टेयर में दालों की बुआई हुई है। पिछले साल इस समय तक राजस्थान में 5.691 लाख हेक्टेयर में दलहनी फसलें बोई गई थी।

दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र रहा, जहां इस बार मात्र 0.373 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हुई है जबकि इसी अवधि तक 2018 में महाराष्ट्र में 5.643 हेक्टेयर में दालें बोई जा चुकी थीं। नीचे दिए गए टेबल में बीते 5 वर्षों के दौरान जून से जुलाई के बीच दालों की बुवाई के तुलनात्मक आंकड़े देख सकते हैं।

8 जुलाई 2019 तक खरीफ फसलों की बुआई

दलहन फसलों में बुआई में सबसे अधिक कमी तूर यानि अरहर दाल में देखने को मिली है। वर्ष 2018 में 5 जुलाई तक जहां 3.69 लाख हेक्टेयर में तूर की फसल बोई जा चुकी थी वहीं इस साल अब तक महज 0.84 लाख हेक्टेयर में तूर की खेती हुई है। तूर दाल की बुआई जून में शुरू होती है और जुलाई तक जारी रहती है। यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि समय रहते तूर दाल की खेती करना आवश्यक होता है अन्यथा इसकी उत्पादकता व्यापक रूप में प्रभावित होती है।

जून में कम बारिश के बाद अब जुलाई में कुछ भागों में अच्छी बारिश की संभावना है। देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा होगी। मध्य और पूर्वी भारत में पहले से ही मध्यम से भारी बारिश कई इलाकों में हो रही है। 10 से 16 जुलाई के बीच इन क्षेत्रों में और अच्छी वर्षा के आसार हैं इसके चलते हमारा अनुमान है कि मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और ओड़ीशा में दालों की बुआई के काम में तेजी आ सकती है।

Image credit: IndiaToday

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