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[Hindi] मॉनसून 2020: बंगाल की खाड़ी पर जल्द बन सकता है निम्न दबाव का क्षेत्र, ओडिशा से लेकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में दे सकता है मूसलाधार मॉनसून वर्षा

August 2, 2020 12:14 PM |

बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्सों और इससे सटे बांग्लादेश तथा म्यांमार से जुड़े भागों पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र 3 अगस्त को बनने की संभावना है। यह सिस्टम 4 अगस्त को बंगाल की खाड़ी के उत्तरी मध्य भागों तक पहुंच सकता है। संभावना है कि मॉनसून के आगमन के बाद बंगाल की खाड़ी में यह अब तक का सबसे प्रभावी सिस्टम होगा। उम्मीद यह भी कि अगर समुद्र में स्थितियाँ अनुकूल होती हैं तो यह सिस्टम डिप्रेशन की क्षमता में जा सकता है। लेकिन यह तेजी से आगे बढ़ेगा जिससे डिप्रेशन से अधिक क्षमता में पहुंचने की संभावना बहुत कम है। संभावित निम्न दबाव का क्षेत्र 5 अगस्त को बंगाल की खाड़ी को पार करते हुए जमीनी भागों पर पहुंच सकता है।

इस समय पश्चिमी प्रशांत महासागर पर एक चक्रवाती तूफान आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में यह हैनान से दक्षिण में है। तूफान पश्चिमी और उत्तर पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते हुए जल्द ही वियतनाम के तटों को पार करेगा। वियतनाम की सीमा पार करने के बाद यह कमजोर होकर डिप्रेशन बन जाएगा और लाओस तथा थाईलैंड के करीब पहुंचेगा। उसके बाद पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते समय इसके और कमजोर होकर निम्न दबाव में तब्दील होने की संभावना है। तेज़ी से म्यामर को पार कर बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करेगा।

English Version: Low pressure to form in the Bay of Bengal, monsoon to become vigorous

मॉनसून सीजन में आमतौर पर जून से सितंबर के बीच हर महीने दो से तीन निम्न दबाव के क्षेत्र या डिप्रेशन की क्षमता वाले मौसमी सिस्टम बंगाल की खाड़ी में उठते हैं। लेकिन इस साल महज एक निम्न दबाव का क्षेत्र बंगाल की खाड़ी पर अब तक बना है। उसके अलावा भी कई अन्य सिस्टम बने लेकिन चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र की क्षमता से अधिक प्रभावी नहीं हो सके।

जून-जुलाई-अगस्त-सितंबर यानि 4 महीनों के इस वर्षा ऋतु में अगस्त महीने की काफी अहम भूमिका होती है। लेकिन इसी महीने में अगर सक्रिय मौसमी सिस्टमों का साथ नहीं मिलता है तो कई बार मॉनसून में ब्रेक की कंडीशन आ जाती है और यह ब्रेक या अंतराल या कहें कि मॉनसून में सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है।

इस संभावित निम्न दबाव या डिप्रेशन के ओडिशा से जमीनी भागों पर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद यह पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात को प्रभावित कर सकता है। इसी के चलते उम्मीद है कि 4 से 7 अगस्त के बीच इन सभी राज्यों में भारी से अति भारी मॉनसून वर्षा देखने को मिलेगी।

गुजरात के उत्तर-पूर्वी हिस्सों साबरकांठा, बनासकांठा, पाटन, दीसा, इडार, मेहसाना और पालनपुर समेत कई इलाकों में जहां अब तक बारिश बहुत कम हुई है, 5 से 7 अगस्त के बीच मूसलाधार वर्षा हो सकती है। इसी दौरान संभावना है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात के कुछ हिस्सों और क्षेत्र के दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कुछ इलाकों में मूसलाधार वर्षा के कारण बाढ़ जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं। वर्तमान संभावित सिस्टम के पीछे ही एक और मौसमी सिस्टम बंगाल की खाड़ी पर विकसित हो सकता, जो पहले सिस्टम के रास्ते ही आगे पश्चिमी तथा उत्तर-पश्चिमी दिशा में बढ़ेगा। इसलिए कह सकते हैं कि 7 अगस्त के बाद भी बारिश में लंबा गैप नहीं होगा।

Image Credit: Down to Earth

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