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[Hindi] दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले 24 घंटों में देश के सभी भागों से अलविदा कह सकता है, इसी दौरान मिनी मॉनसून के दस्तक देने का अनुमान

October 27, 2020 1:18 PM |

वर्ष 2020 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हाल के कई वर्षों की तुलना में सबसे लंबा मॉनसून होने की दिशा में अग्रसर है। अब यह कह सकते हैं कि 4 महीनों का बारिश का सीजन दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत पर अपने 5 महीने पूर्ण करने वाला है। अगर इस साल अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह पर इसके आगमन की तिथि से वर्तमान स्थिति का आकलन करें तो 5 महीने पहले ही पूरे हो चुके हैं। अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2020 का आगमन 16 मई को हो गया था। मॉनसून का आगमन समय से पहले न सिर्फ अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में हुआ बल्कि केरल में भी समय से पहले पहुंचा और समूचे भारत को इसने 26 जून तक कवर कर लिया था जो कि आमतौर पर 8 जुलाई तक कवर करता है। एक तरफ पहले आया और दूसरी ओर देर से विदा हो रहा है। इसीलिए सबसे लंबा मॉनसून कहा जाएगा।

आमतौर पर 15 अक्टूबर के आसपास (+/-5 दिन) संपूर्ण भारत से दक्षिण पश्चिम मॉनसून अलविदा कह जाता है। लेकिन अब तक मॉनसून सभी क्षेत्रों से वापस नहीं लौटा है। हालांकि अगले 24 घंटों में इसके संपूर्ण भारत से अलविदा कहने की संभावना है। इसके विपरीत, 2018 में मॉनसून की संपूर्ण भारत से वापसी 20 अक्टूबर तक हो गई थी। जबकि 2019 में काफी देर से 9 अक्टूबर को मॉनसून की वापसी शुरू हुई। लेकिन तेज गति से पीछे लौटते हुए दक्षिण-पश्चिम मॉनसून संपूर्ण भारत से 6 दिनों के भीतर विदा हो गया था। यानी पिछले साल 15 अक्टूबर तक मॉनसून की विदाई हो गई थी।

Read English Version: Southwest Monsoon finally to completely withdraw in next 48 hours, paving way for Northeast Monsoon

इस साल उत्तर भारत में मॉनसून के वापस होने से बहुत पहले से ही ज्यादातर जगहों पर बारिश बंद हो गई थी। मॉनसून की वापसी निर्धारित समय से देरी से 28 सितंबर को शुरू हुई उसके बाद 6 अक्टूबर तक मॉनसून आगे बढ़ता रहा। लेकिन 6 अक्टूबर को ब्रेक लगी और लगभग 2 सप्ताह तक मॉनसून की वापसी में कोई प्रगति नहीं हुई।

अक्टूबर महीने में अब तक देश में सामान्य से 12% अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसमें कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर जितनी बारिश होती है उससे दोगुनी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिसमें मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र और कच्छ, कोंकण और तेलंगाना के क्षेत्र शामिल हैं।

अब बंगाल की खाड़ी में जो मौसमी सिस्टम विकसित हो रहे हैं उनका रुख मध्य भारत की बजाए पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की तरफ होने की संभावना है। यह स्थितियां संकेत करती हैं कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए रास्ता साफ हो रहा है और उत्तर-पूर्वी मॉनसून के आगमन के लिए परिदृश्य बनने लगा है।

कभी-कभी ऐसा भी देखने को मिलता है कि लगभग एक ही समय पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून विदा होता है और उत्तर-पूर्वी मॉनसून का तुरंत ही आगमन हो जाता है। इस बार कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। अनुमान है कि अगले 24 घंटों में देश का मुख्य मॉनसून सभी क्षेत्रों को अलविदा कह जाएगा और इसी दौरान उत्तर-पूर्वी मॉनसून यानी मिनी मॉनसून के आगमन के लिए वातावरण बन जाएगा।

Image Credit: The Economic Times

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