[Hindi] बिहार का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान (11-17 जुलाई, 2020) और फसल सलाह

July 11, 2020 6:25 PM |

आइए जानते हैं बिहार में इस सप्ताह यानि 11 से 17 जुलाई के बीच कैसा रहेगा मौसम। जानेंगे फसलों से जुड़ी सलाह भी।

साल 2020 का मॉनसून बिहार में ज़बरदस्त बारिश दे रहा है। बिहार के अधिकांश जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। कुछ जिलों का बाढ़ का संकट भी झेलना पड़ा है। 1 जून से लेकर अब तक बिहार में सामान्य से 52% अधिक बारिश हुई है।

मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय भी हिमालय के तराई क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। जिसके प्रभाव से बिहार में 12 जुलाई तक भारी वर्षा जारी रहेगी। 13 जुलाई से बारिश की गतिविधियां कम होंगी। और अनुमान है कि 14 से 17 जुलाई के बीच बिहार में बारिश कम रहेगी। हालांकि एक-दो स्थानों पर भारी और कहीं-कहीं पर मध्यम वर्षा जारी रह सकती है।

पिछले एक सप्ताह से हो रही भारी वर्षा के कारण उत्तरी बिहार में अधिकांश नदियां उफान पर हैं। परंतु 13 जुलाई के बाद वर्षा में कमी आने के कारण धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की संभावना है।

बिहार के किसानों के लिए फसल सलाह

मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को सुझाव है कि हाल में नर्सरी में डाले गए धान विचड़ो में पानी लगने से बचाएँ। रोपनी किए जाने वाले खेत की मेड़ों को चारों तरफ से बांधकर मेड़ को मजबूत करें और खेत में पानी रोके रखें। तैयार नर्सरी की 20×15 सें.मी. की दूरी पर रोपाई करें।

धान में खरपतवार के नियंत्रण हेतु रोपाई के 3-4 दिनों के अंदर बुटाक्लोर 50 ई.सी. या प्रीटिलाक्लोर 50 ई.सी. तृणनाशी 3 लीटर 500-600 लीटर पानी में घोलकर या 40 से 50 कि.ग्रा. बालू में मिलाकर खेत में भुरकाव या छिड़काव करें। तथा 5 दिनों तक 2-3 इंच पानी अवश्य रहने दें।

बरसात के कारण मड़ुआ में जंगली राईस, साँवा, मोथा, मकरा आदि खरपतवारों की भरमार हो जाती है जिससे फसल की वनस्पतिक वृद्धि प्रभावित होती है। इसके नियंत्रण के लिए मड़ुआ रोपनी के 15-20 दिनों के बाद खुरपी से घासों को निकाल दें या रासायनिक नियंत्रण हेतु एजीम सल्फ्युरान 50% तृणनाशी 40 ग्राम 500 लीटर पानी में घोलकर रोपाई के 20 दिनों के बाद डालें।

खरीफ में लगाए गए लोबिया एवम् कलाई (उरद) के खेत से खरपतवारों को बाहर निकालें। इसमें वर्षा का पानी नहीं लगने दें। समुचित जल तथा खरपतवार प्रबंधन कर लोबिया तथा कलाई की गुणवतापूर्ण उपज प्राप्त की जा सकती है।

अरहर की खेती हेतु संस्तुत राइजोबियम बैक्टीरिया का अवश्य प्रयोग करें। बरसात में अरहर+मक्का या अरहर+लोबिया की अंतरवर्ती खेती मृदा स्वास्थ्य के साथ-साथ दोहरे लाभ कमाने वाली फसल साबित होती है।

खेती में लगे किसान मजदूर एक दूसरे से उचित दूरी बनाकर रखें। जिससे तीव्र गति से फैल रहे कोविड-19 की महामारी को रोकने में मदद मिले और आप सुरक्षित रहें।

Image credit: News Gram

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