[Hindi] बिहार का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान (30 मई-5 जून, 2020) और फसल सलाह

May 30, 2020 2:10 PM |

आइए जानते हैं बिहार में इस सप्ताह यानि 30 मई से 5 जून के बीच कैसा रहेगा मौसम। जानेंगे फसलों से जुड़ी सलाह भी।

पिछले कुछ दिनों से बिहार में वर्षा की गतिविधियां जारी हैं, विशेषकर पूर्वी तथा उत्तर पूर्वी जिलों में अच्छी वर्षा देखी गई है।

अगले एक सप्ताह के दौरान बिहार के कई जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है जिससे तापमान सामान्य से कुछ कम ही बने रहेंगे।

हालांकि भारी तथा अति भारी वर्षा होने की संभावना बहुत ही कम है, परंतु अगले सप्ताह के दौरान मौसम अधिक समय के लिए शुष्क नहीं रहेगा। आसमान में बादल छाए रहेंगे तथा 1-2 स्थानों पर गरज के साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। कहीं-कहीं बारिश भी होती रहेगी।

बिहार के किसानों के लिए फसल सलाह

आगामी कुछ दिनों में तेज हवाएं चलने के साथ हल्की से मध्यम वर्षा को ध्यान में रखते हुए कृषक बंधु गरमा मूंग/उड़द में सिंचाई से बचें और खेत में पानी भर जाए तो जल निकास का प्रबंधन करें।

रोहिणी नक्षत्र में वर्षा होने से धान की लंबी अवधि की क़िस्मों की नर्सरी डालना अधिक सुलभ होगा जिसे खेत तैयार कर डालना जारी रखें। 155 से 160 दिनों में परिपक्व होने वाली क़िस्मों एम.टी.यू-7029, राजेंद्र महसूरी-1 इत्यादि का चुनाव कर शुद्ध एवं संपुष्ट बीज का नर्सरी के लिए प्रयोग करें। देर से पकने वाली इन क़िस्मों की नर्सरी में बिजाई 25 मई से 10 जून तक से की जा सकती है।

एक हेक्टेयर में धान लगाने हेतु 1000 वर्ग मीटर जमीन की भली-भांति जुताई करके उसमें 3 कि.ग्रा. एन.पी.के 12-32-16 ग्रेड के साथ 1 कि.ग्रा. यूरिया मिट्टी में मिलाकर नर्सरी तैयार करें। जमीन से 10-15 सें.मी. ऊंची क्यारी में 25-30 कि.ग्रा.की दर से बीज बोएँ।

श्री विधि से खेती करने हेतु प्रति हेक्टेयर 5 कि.ग्रा. बीज की आवश्यकता होती है जिसके लिए 100 वर्ग मीटर में नर्सरी प्रयाप्त है।

25 मई से 15 जून खरीफ मक्का की बुवाई का उचित समय होता है। रोग-व्याधि प्रतिरोधी क्षमता वाली क़िस्मों शक्तिमान-1, सुवान, देवकी आदि के स्वस्थ एवं प्रमाणित बीजों का चुनाव कर लगाएं। उचित पौध घनत्व के लिए 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बीज को 60×20 सेंमी की दूरी पर लगाएं। बीज बुवाई से पूर्व बीज को कीटनाशक एवं फफूंदनाशक से अवश्य उपचारित करें।

मक्का के साथ खरीफ में लोबिया, अरहर इत्यादि की खेती भी की जा सकती है। इससे प्रकृतिक नाइट्रोजन आकर्षित होता है जो मुख्य फसल यानि मक्के को हस्तांतरित होता है जिससे उपज  में बढ़ोतरी होती है।

Image Credit: Uday India

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