[Hindi] हरियाणा का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान (03-09 जून, 2020) और फसल सलाह

June 3, 2020 7:04 PM |

आइए जानते हैं हरियाणा में 3 से 9 जून के बीच कैसा रहेगा मौसम का हाल। फसलों से जुड़ी सलाह भी जानते हैं।

हरियाणा में इस सप्ताह रुक-रुक कर प्री-मॉनसून वर्षा होती रहेगी। हरियाणा में भी अब खेती की गतिविधियां तेज़ होंगी। खरीफ फसलों के लिए खेतों की तैयारी की जाएगी ऐसे में किसानों को इंतजार होता है मॉनसून का। लेकिन आपको बता दें कि हरियाणा में मॉनसून आमतौर पर जून के आखिर में दस्तक देता है।

इस बार भी अपने सामान्य समय के आसपास मॉनसून के आगमन का अनुमान है। इस बीच इस सप्ताह यानि 3 जून से लेकर 9 जून के बीच हरियाणा में मौसम का मिलाजुला असर रहेगा। कुछ इलाकों में रुक-रुक कर प्री-मॉनसून वर्षा हो सकती है। बारिश की यह गतिविधियां एक साथ सभी जगह पर नहीं होंगी और बहुत ज्यादा नहीं होंगी।

लेकिन पानीपत, सोनीपत, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला, सिरसा, हिसार, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, पलवल सहित लगभग सभी जिलों में आंशिक बादल आते जाते रहेंगे। रुक रुक कर इस सप्ताह वर्षा होती रहेगी मौसम पूरी तरह से साफ नहीं होगा बारिश भी बहुत तेज नहीं होगी तो तापमान में बहुत अधिक बढ़ोतरी होने की संभावना फिलहाल नहीं है लेकिन उमस के कारण कम तापमान भी परेशान कर सकता है।

हरियाणा के किसानों के लिए इस हफ्ते की एड्वाइज़री....

तेज़ आँधी के साथ वर्षा के अनुमान को देखते हुए किसान बंधु अभी सिंचाई व छिड़काव आदि की प्रतिक्रियाओ को स्थगित कर दें। मौसम में हो रहे बदलावो के कारण फसलों में कीटो व रोगो का प्रकोप हो सकता है इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करते रहें। मिर्ची की फसल में थ्रिप्स या सफ़ेद मक्खी का प्रकोप हो तो 400 मिली मेलाथियान 50 ई.सी. को 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़कें, आवश्यकता होने पर 15-20 दिन बाद छिड़काव को दोहराएँ। इस छिड़काव से मिर्ची की फसल में होने वाले वायरस जनित रोगो से भी सुरक्षा होती है।

भिंडी की फसल में हरा तेला व चित्तीदार सूँडी से बचाव के लिए 300-500 मि.ली. मेलाथियान 50 ई.सी. को 200-300 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़कें। दवा छिड़कने के बाद 8-10 दिन तक फल खाने के प्रयोग में न लें। कपास की फसल में पहली सिंचाई सामान्यतः बुवाई के 45-50 दिन बाद दी जाती है, पहली सिंचाई देने से पहले गुड़ाई अवश्य करें, ऐसे करने से खर-पतवार व घास-फूस तो नष्ट होती ही है, नमी भी अधिक समय तक बनी रहती है। जहाँ तक संभव हो सिंचाई देर से ही करें। 

गन्ने की फसल में मिट्टी की नमी के अनुसार 7 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। मौसम साफ हो जाने पर गन्ने की फसल में नाइट्रोजन की दूसरी खुराक 65 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से दें।

Image Credit: The Indian Express

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