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[Hindi] मध्य प्रदेश का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान (14 से 20 अगस्त, 2020), फसल सलाह

August 14, 2020 3:46 PM |

आइए जानते हैं मध्य प्रदेश में कैसा रहेगा 14 से 20 अगस्त के बीच मौसम। और क्या है मध्य प्रदेश के किसानों के लिए हमारे पास खेती से जुड़ी सलाह।

मध्य प्रदेश में अब तक मॉनसून वर्षा सामान्य से कम हुई है। 1 जून से 14 अगस्त के बीच पश्चिमी मध्य प्रदेश में 9% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थितियाँ सुधरी हैं और पिछले हफ्ते के 15% कम के मुक़ाबले अब 9% कम रह गई है।

पिछले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश हुई है। खंडवा में 144, होशंगाबाद में 68, बेतूल में 67, मलंजखंड में 55, छिंदवाड़ा में 29, नौगाँव में 25, सतना में 21 और सीधी में 20 तथा शाजापुर में 16 मिलीमीटर वर्षा हुई।

बंगाल की खाड़ी पर बने एक निम्न दबाव के प्रभाव से पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 और 16 अगस्त को मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। 17 और 18 अगस्त को मध्य प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी जिलों में वर्षा की गतिविधियों में काफी वृद्धि हो सकती है। 19 अगस्त से मध्य प्रदेश में जारी वर्षा की गतिविधियों में कमी आएगी परंतु हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी।

इस सप्ताह अच्छी बारिश के प्रभाव से मध्य प्रदेश मेंवर्षा के आंकड़ों में सुधार होगा तथा सूखे की मार झेल रहे जिलों को कुछ राहत मिलेगी।

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए फसल सलाह

अगर कोई फसल कम अंकुरित हुई हो या फसल नष्ट हो गई हो तो किसान भाई कम समय में पकने वाली फसलें ग्वारफली, उड़द, मूंग आदि की बुआई कर सकते हैं। अत्याधिक नमी के कारण फसलों में कीटो का प्रकोप व रोग संक्रमण होने की संभावना है, इसलिए नियमित निगरानी करते रहें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उपचार करें।

सोयाबीन, कपास व मूँगफली की फसलों में जड़गलन, तना-सड़न, उकठा एवं अंगमारी (पत्तियों पर धब्बे) जैसे रोगों की रोकथाम के लिए 1 मिली. हेक्साकोनाजोल या पाइरोक्लोस्ट्रोबिन  प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। सोयाबीन एवं अन्य दलहनी फसलों में पीला मोज़ेक रोग से ग्रसित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर नष्ट करें तथा पीला मोज़ेक फैलाने वाली सफ़ेद मक्खी के वयस्कों को नष्ट करने के लिए खेत में जगह-जगह पर पीले चिपचिपे ट्रेप का प्रयोग करें। 

सोयबीन तथा अन्य तिलहनी-दलहनी फसलों में हरी, भूरी सेमीलूपर (अर्ध कुंडलाकार इल्ली), चने व तंबाकू की इल्लियों के जैविक नियंत्रण हेतु एन.पी.बी. 250 एल.ई. या बिवेरिया बेसियाना या बेसिलस थुरेंजिऐन्सिस 1 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर या ल्यूफेनरान 5 ई.सी. की 500 मिली. मात्रा प्रति हेक्टर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। कीटों के प्रकोप के अधिकता होने पर रसायन इंडोक्साकार्ब 14.5 एस.सी. 300 मिली. प्रति हेक्टर साफ मौसम में छिड़काव किया जा सकता है।

मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल, मूँगफली, कपास की फसलों में खेतो में यूरिया की शेष मात्रा डालें। मौसम अनुकूल होने पर कपास व गन्ने की फसल में निराई-गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाने का काम करें। कद्दू-वर्गीय सब्जियों व बागबानी फलों को लगाने के लिए अभी समय अनुकूल है, तैयार पौधों की रोपाई करें। खरीफ प्याज़ के पौधो के आसपास खरपतवारों का नियंत्रण करें।  

Image credit: Free Press Journal

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