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[Hindi] महाराष्ट्र का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान (17 से 23 अगस्त, 2020), और फसल सलाह

August 17, 2020 1:00 PM |

आइए जानते हैं 17 से 23 अगस्त के बीच कैसा रहेगा मौसम।

महाराष्ट्र के अधिकांश भागों के लिए साल 2020 का मॉनसून अब तक अच्छा ही माना जाएगा। समूचे राज्य में 1 जून से 17 अगस्त के बीच सामान्य से 14% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मराठवाड़ा में 33% अधिक पर वर्षा हुई है, मध्य महाराष्ट्र में 28%, कोंकण गोवा में 20% अधिक वर्षा प्राप्त दर्ज की गई है। विदर्भ एकमात्र ऐसा क्षेत्र जहां सामान्य से कम (9%) वर्षा हुई है। हालांकि इस सप्ताह अच्छी बारिश इस कमी की भरपाई कर देगी।

इस बीच 16 और 17 अगस्त के बीच पिछले 24 घंटों के दौरान महाराष्ट्र के अधिकांश इलाकों में अच्छी वर्षा देखी गई है। महाबलेश्वर को सबसे अधिक 206 मिलीमीटर वर्षा प्राप्त हुई है। रत्नागिरी, माथेरान तथा औरंगाबाद में भी तेज बारिश दर्ज की गई।

इस सप्ताह के बाकी दिनों में भी अच्छी बारिश राज्य के कई इलाकों में हो सकती है। 21 अगस्त तक विदर्भ के कई भागों सहित कोंकण और गोवा में मध्यम से भारी बारिश जारी रहने की संभावना है, जबकि मराठवाड़ा तथा दक्षिणी मध्य महाराष्ट्र में वर्षा की गतिविधियां काफी कम रहेंगी। मध्य महाराष्ट्र में नासिक, मालेगाव, अहमदनगर तथा शिरडी जैसे उत्तरी भागों में में हल्की बारिश जारी रह सकती है। पुणे में भी रुक-रुक कर हल्की बारिश होती रहेगी।

मुंबई और इसके आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां अगस्त के आखिर तक जारी रह सकती हैं। 20 और 21 अगस्त को मुंबई के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की भी संभावना है।

महाराष्ट्र के किसानों के लिए फसल सलाह:

कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में धान की फसल टिलरिंग की अवस्था में हैं। ऐसे में अधिक पानी लगना ठीक नहीं है इसलिए जहां भारी वर्षा हो, वहाँ पानी के निकासी का प्रबंध करें। 2-5 सेमी. गहरा पानी ही रखें। धान की फसल में तना छेदक, पत्ती-लपेटक व भूरे फुदके का प्रकोप पाया जा रहा हो तो मौसम अनुकूल होने पर मोनोक्रोटोफॉस 36% को 1 मिली. प्रति लीटर पानी तथा 2.5 ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें।

कोंकण में बैंगन तथा अन्य सब्जियों की फसलों में डाउनी मिलड्यू का प्रकोप दिखे तो नियंत्रण के लिए मेंकोज़ेब 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।

मक्के की फसल में फॉल आर्मी वर्म से बचाव हेतु उचित उपाय करें। मध्य महाराष्ट्र व मराठवाडा के किसान अधसाली गन्ने की बुआई शीघ्र ही पूरी करें। कपास के खेतो में फेरोमोन ट्रेप लगाएँ ताकि गुलाबी वर्म का नियंत्रण हो सके। कपास, मूंग, उड़द की फसल में चूसक कीटो का प्रकोप हो तो 5% नीमर्क घोल का छिड़काव साफ मौसम में करें।

सोयबीन की फसल में पत्ती-काटने वाले केटरपिलर का प्रकोप हो तो 5 लाइट ट्रेप प्रति हेक्टर लगाएँ। तुअर की 45 दिन की फसल में सिरे की कलियों को काट दें, ऐसा करने से उपज में वृद्धि होती है। फल बागों में यदि जल-जमाव हो तो इसकी निकासी का तुरंत उपाय करें।

Image credit: Maharashtra Today

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