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[Hindi] इस सीज़न में अब तक सर्दी: हल्का गर्म रहा दिसम्बर, जनवरी में पड़ी अपेक्षित ठंड

February 10, 2018 11:01 AM |

Cold wave in Lucknowबीते 2-3 वर्षों से उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में हाड़ कंपाने वाली सर्दी में कमी देखने को मिल रही है। कह सकते हैं कि कई दिनों तक छाया घना कोहरा, बर्फीली हवाएँ और शून्य के पास पहुंचता तापमान पिछले कुछ वर्षों से कम होता जा रहा है। सर्दी के वर्तमान सीज़न में भी यही क्रम कमोबेस जारी रहा। दिसम्बर की शुरुआत कम सर्दी के साथ हुई और पूरे महीने तापमान अपेक्षा के अनुरूप नहीं गिरा। इसके लिए मुख्यतः सर्दियों में होने वाली बारिश को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

भारत में कड़ाके की ठंड मुख्य रूप से पहाड़ों पर होने वाली बारिश और बर्फबारी के चलते पड़ती है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में होने वाली बारिश और बर्फबारी के बाद वहाँ से होकर आने वाली ठंडी हवाओं के तेज़ होने पर सर्दियाँ बढ़ती हैं जबकि हवा का रुख बदलने और अरब सागर से होकर आने वाली गर्म हवाओं के चलते सर्दी में व्यापक कमी आती है। स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी राज्यों पर बर्फबारी देने के बाद जब पश्चिमी विक्षोभ आगे निकल जाता है और पहाड़ों से बर्फीली हवाएँ मैदानों तक पहुँचती हैं तब लोगों को कड़ाके की ठंड का एहसास होता है।

जहां तक इस बार की सर्दियों में दिसम्बर में हुई बारिश या बर्फबारी की बात है तो एक बार ही ऐसा मौका था जब पहाड़ों पर अच्छी बर्फ पड़ी। उसके पहले और बाद में अधिकांश समय मौसम मुख्यतः शुष्क रहा। हालांकि एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू कश्मीर से होकर गुजरते रहे लेकिन वह पहाड़ों पर बारिश या बर्फबारी देने में नाकाम रहे क्योंकि यह सिस्टम या तो यह कमजोर थे या काफी ऊंचाई से निकल रहे थे।

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इसके चलते तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा और कुछ दिनों को छोड़ दें तो अधिकांश समय कोहरा भी घना नहीं हुआ। यही कारण है कि दिसम्बर में पारा ऊपर रहा और उम्मीद तथा सामान्य से कम सर्दी पड़ी। जनवरी की शुरुआत भी कुछ इसी तरह की हुई और मौसम में कोई विशेष बदलाव नहीं देखा गया। लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियाँ बदलीं और जनवरी में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आने का क्रम धीरे-धीरे बढ़ गया। यह सिस्टम अपेक्षाकृत सक्रिय भी थे जिससे छोटे-छोटे अंतराल पर पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी दर्ज की गई। हालांकि यह भी सामान्य से कम रही।

पश्चिमी विक्षोभ के आने की संख्या बढ़ने के चलते मैदानी भागों में भी प्रायः बादल दिखाई दिये लेकिन बारिश महज़ 22-23 जनवरी को ही हुई। जनवरी में कई बार पहाड़ों से होकर आने वाली हवाओं ने कड़ाके की ठंड का एहसास भी कराया। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में तापमान सामान्य के आसपास बना रहा जिससे कम से कम जनवरी में उम्मीद के आसपास सर्दी पड़ गई। फरवरी में अब तक तापमान में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है जिससे ठंडी भी कभी बढ़ गई है जबकि कभी घट गई है।

Image credit: LiveMint

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