दिल्ली में मानसून की एंट्री में देरी, लेकिन शनिवार-रविवार को मौसम बदलने के आसार
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दिल्ली और एनसीआर के साथ अब तक आँखमिचौली खेलता रहा है। हालाँकि नमी, हवाओं की दिशा, बादल और तापमान ये सभी तत्व मानसून के अनुकूल दिखाई दे रहे थे, फिर भी बारिश का इंतजार ही रह गया, क्योंकि बीती रात यानी 25 जून की रात में कोई खास बारिश नहीं हुई। बता दें, कल दिन में कई बार आसमान को बादलों ने ढक दिया, लेकिन मानसूनी बारिश नहीं दिखाई दी। ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली में मानसून अपने निर्धारित आगमन की तारीख 27 जून को चूक सकता है, और अब इसका आना सप्ताहांत (वीकेंड) तक टल सकता है।
चक्रवाती परिसंचरण और दक्षिण की ओर खिंची ट्रफ
इस समय दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उससे सटे मध्य प्रदेश के हिस्सों पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इस सिस्टम से एक पूर्व-पश्चिम दिशा में ट्रफ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ होते हुए उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक फैली हुई है। यह ट्रफ दिल्ली से काफी दक्षिण में है, इसी कारण आज मानसून की वर्षा के दिल्ली तक पहुँचने की संभावना बहुत कम है। हालाँकि, एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह ट्रफ धीरे-धीरे उत्तर की ओर खिसक सकती है।
हल्की बारिश की संभावना, लेकिन अभी नहीं आएगा मानसून
ट्रफ के नजदीक आने से शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में कहीं-कहीं हल्की, छिटपुट और थोड़ी देर की बारिश संभव है, खासकर शाम के समय। लेकिन यह वर्षा मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए काफी नहीं होगी। मानसून की सही शुरुआत की संभावना सप्ताहांत में अधिक है, जब शनिवार 29 जून और रविवार 30 जून को दिल्ली में मानसूनी बारिश देखने को मिल सकती है।
मानसून की देरी, लेकिन लंबे ठहराव की उम्मीद
अगर ऐसा हुआ, तो मानसून अपने निर्धारित समय से थोड़ा पीछे रहेगा। लेकिन संकेत साफ हैं कि यह पूर्व-पश्चिम ट्रफ 28 जून तक दिल्ली के उत्तर में खिसक सकती है। आमतौर पर इस तरह की ट्रफ जब किसी क्षेत्र को पार करती है, तो वर्षा और गरज-चमक के साथ showers को ट्रिगर करती है। दिल्ली में शनिवार देर शाम को अच्छी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद, 2 जुलाई तक अगले पांच दिनों तक रुक-रुक कर हल्की-तेज़ बारिश दिल्ली में होती रहेगी, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।







