Gujarat Update: गुजरात में मानसून की एंट्री में देरी के आसार, 40 डिग्री के पार बना रहेगा तापमान
मुख्य मौसम बिंदु
- दक्षिण गुजरात में 15 जून की सामान्य मानसून तिथि निकल गई।
- कई शहरों में तापमान 40°C के आसपास बना हुआ है।
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई प्रभावी मौसम प्रणाली नहीं।
- गुजरात के कई हिस्सों में मानसून की एंट्री जून के अंतिम सप्ताह तक।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की पश्चिमी शाखा इस समय दक्षिण कोंकण तट पर अटक गई है। मानसूनी धाराएं कमजोर पड़ चुकी हैं और इस क्षेत्र में बारिश की गतिविधियाँ भी काफी कम हो गई हैं। कोंकण क्षेत्र में मानसून की प्रगति रुकने का असर अब गुजरात पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण गुजरात में मानसून के पहुंचने की सामान्य तिथि 15 जून होती है, लेकिन इस बार मानसून तय समय पर नहीं पहुंच सका। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में भी दक्षिण गुजरात तट पर मानसून के पहुंचने की संभावना कम नजर आ रही है। वहीं अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर और वल्लभ विद्यानगर समेत कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है। अगले एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
सामान्य तिथि से पीछे चल रहा मानसून, अंदरूनी गुजरात में और बढ़ेगी देरी
आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 जून तक दक्षिणी तटीय गुजरात में पहुंच जाता है और 20 जून तक सौराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों के साथ-साथ मध्य और उत्तर गुजरात को भी कवर कर लेता है। इसके बाद मानसून की गति धीमी पड़ती है और कच्छ की अंतिम सीमा तक पहुंचने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है। लेकिन इस बार मौसम परिस्थितियाँ सामान्य नहीं हैं। वर्तमान संकेत बताते हैं कि गुजरात के अंदरूनी हिस्सों में मानसून की एंट्री में असामान्य और लंबी देरी हो सकती है। इसका मतलब है कि गुजरात के कई हिस्सों को बारिश के लिए सामान्य से ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है।
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नहीं मिल रहा मानसून को सहारा
दक्षिण और मध्य गुजरात में मानसून को आगे बढ़ाने में बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों की अहम भूमिका होती है। जब ये सिस्टम महाराष्ट्र और गुजरात के मध्य भागों तक पहुंचते हैं, तो वे अरब सागर से नमी खींचकर मानसून को आगे बढ़ाते हैं और अच्छी बारिश का दौर शुरू होता है। इसके अलावा अरब सागर में तट के पास बनने वाले चक्रवाती परिसंचरण भी राज्य में मौसमी बारिश को बढ़ावा देते हैं। लेकिन फिलहाल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों ही क्षेत्रों में ऐसा कोई प्रभावी मौसम सिस्टम विकसित होने की संभावना नहीं दिख रही है। यही वजह है कि मानसून की प्रगति लगभग थम सी गई है।
पाकिस्तान से आ रही गर्म हवाएं बढ़ा रहीं तापमान
मानसून की देरी का असर तापमान पर भी साफ दिखाई देगा। शुष्क हवाओं के कारण गुजरात के अंदरूनी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है या इससे ऊपर जा सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से गर्म हवाएं भी गुजरात को प्रभावित कर रही हैं। पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। बलूचिस्तान के सिबी, नोककुंडी और दल बदिन जैसे शहरों में तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वहीं सिंध के नवाबशाह, रोहरी और छोर में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ अरब सागर से कुछ नमी वाली हवाएं ला रहा है, जिससे गुजरात में तापमान में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि, गर्म मौसम से वास्तविक राहत तब तक नहीं मिलेगी जब तक मानसून गुजरात के भीतर गहराई तक प्रवेश नहीं कर जाता। मौजूदा संकेतों के अनुसार मानसून का आगमन जून 2026 के अंतिम सप्ताह तक खिंच सकता है।
यह भी पढ़ें: मुंबई से कुछ दूर ठहरा मानसून, इस सप्ताह फिर टली मानसून की एंट्री, टूट सकता है देरी का रिकॉर्ड
यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में अगले 4 दिन प्री-मानसून आँधी और बारिश, फिर 40°C के पार पहुंचेगा पारा, मानसून अभी दूर





