अरब सागर में लो-प्रेशर बनने की संभावना, पश्चिमी तट से दूर रहेगा सिस्टम, मानसून पर होगा असर

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
May 21, 2026, 3:30 PM
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अरब सागर में लो-प्रेशर

मुख्य मौसम बिंदु

  • 23 मई के आसपास अरब सागर में लो प्रेशर बनने के संकेत।
  • अगले 24-48 घंटे सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण।
  • मानसून की प्रगति और केरल की बारिश प्रभावित हो सकती है।
  • मौसम मॉडल फिलहाल अलग-अलग अनुमान दे रहे हैं।

दक्षिण-मध्य अरब सागर के ऊपर 23 मई 2026 के आसपास एक कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) बनने की संभावना दिखाई दे रही है। फिलहाल निचले स्तरों में दक्षिण-मध्य अरब सागर से लेकर लक्षद्वीप क्षेत्र तक पूर्व-पश्चिम दिशा में एक ट्रफ बनी हुई है। इसी क्षेत्र में घने बादलों का समूह और तेज संवहनीय गतिविधियाँ भी देखी जा रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, कल तक इस क्षेत्र में एक चक्रवाती परिसंचरण बनने की उम्मीद है, जो अगले दिन कम दबाव के क्षेत्र में बदल सकता है।

अरब सागर में हलचल, सैटेलाइट इमेज

अरब सागर में हलचल, सैटेलाइट इमेज

मौसम मॉडल में मतभेद, अगले 24 घंटे बेहद अहम

इस संभावित सिस्टम को लेकर अलग-अलग मौसम मॉडल अलग संकेत दे रहे हैं। कुछ मॉडल सिस्टम के मजबूत होने की संभावना जता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कमजोर बनाए रख रहे हैं। इसलिए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट तभी होगी, जब वास्तव में लो प्रेशर एरिया विकसित हो जाएगा। अगले 24 घंटे इस सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसी दौरान हवाओं का पैटर्न संगठित हो सकता है, जिससे सिस्टम को मजबूती मिल सकती है। अगर ऐसा होता है, तो समुद्री वातावरण इस सिस्टम के बने रहने और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल नजर आ रहा है।

मानसून की चाल पर पड़ सकता है असर, केरल में बारिश हो सकती है कमजोर

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर में बनने वाले ऐसे लो प्रेशर सिस्टम जब मजबूत होते हैं, तो आमतौर पर पश्चिमी तट से दूर दिशा में आगे बढ़ते हैं। आगे चलकर सोमालिया तट, अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र, यमन और ओमान में तूफानी मौसम की स्थिति बन सकती है। ये सिस्टम अरब सागर की हवाओं के प्रवाह को भी प्रभावित करते हैं। चूंकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत का समय करीब है, इसलिए यह सिस्टम लक्षद्वीप, दक्षिण-पूर्व अरब सागर, मालदीव और केरल-कर्नाटक तट के पास बनने वाली जरूरी पश्चिमी हवाओं को कमजोर कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो केरल में बारिश की गतिविधियाँ घट सकती हैं और मानसून की एंट्री में देरी भी हो सकती है। हालांकि, फिलहाल यह केवल शुरुआती संकेत हैं और सही पूर्वानुमान के लिए अगले 48 घंटों तक लगातार निगरानी बेहद जरूरी होगी।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

दक्षिण-मध्य अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र के आसपास लो प्रेशर बनने के संकेत हैं।

हाँ, यह सिस्टम मानसून की पश्चिमी हवाओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे केरल में मानसून की एंट्री में देरी संभव है।

अगले 24 से 48 घंटों में मौसम प्रणाली के विकास के बाद तस्वीर ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है