7 दिन की देरी से दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्य प्रदेश पहुँचा मानसून, जानें आगे कहां होगी बारिश?
मुख्य मौसम बिंदु
- 4 जून को मानसून दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्य प्रदेश में पहुंचा।
- दक्षिण मध्य प्रदेश में खरगोन में सबसे अधिक 117 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
- दक्षिण गुजरात में मानसून पहुंचने के बावजूद भारी बारिश अभी नहीं हुई है।
- अरब सागर से नमी और सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण बारिश को बढ़ावा दे रहे हैं।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान अगले 2 से 3 दिनों तक प्रभावी है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार 24 जून को दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्य प्रदेश में प्रवेश कर लिया। मानसून का यह आगमन सामान्य तिथि की तुलना में लगभग एक सप्ताह की देरी से हुआ है। हालांकि मानसून की यह प्रगति इसके उत्तर की ओर बढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन नए क्षेत्रों में वर्षा का वितरण अभी भी असमान बना हुआ है। कुछ स्थानों पर अच्छी बारिश हुई है, जबकि कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रही हैं।
दक्षिण मध्य प्रदेश में जमकर बरसे मानसूनी बादल
दक्षिण गुजरात की तुलना में दक्षिण मध्य प्रदेश में मानसून काफी अधिक सक्रिय नजर आया। पिछले 24 घंटों के दौरान क्षेत्र के कई जिलों में व्यापक वर्षा दर्ज की गई। प्रमुख वर्षा आंकड़ों में खरगोन में 117 मिमी, होशंगाबाद में 56 मिमी, सीहोर में 58 मिमी, भोपाल में 38 मिमी, रायसेन में 29 मिमी, उज्जैन में 24 मिमी और इंदौर में 22 मिमी बारिश दर्ज की गई। मानसून के सक्रिय चरण में इस प्रकार की वर्षा सामान्य मानी जाती है और इससे लंबे समय से जारी शुष्क मौसम से लोगों को राहत मिली है।

दक्षिण गुजरात में अभी भी कमजोर है मानसून की गतिविधि
भारतीय मौसम विभाग ने सूरत, वलसाड, डांग, नवसारी, नर्मदा और आसपास के दक्षिण गुजरात के क्षेत्रों में मानसून के आगमन की घोषणा कर दी है। इसके बावजूद इन जिलों में अभी तक भारी और लगातार वर्षा देखने को नहीं मिली है। मानसून के प्रवेश के बाद आमतौर पर जिस तरह की लगातार बारिश होती है, वैसी स्थिति फिलहाल दक्षिण गुजरात में नहीं बनी है। इसलिए क्षेत्र अभी भी मानसून की वास्तविक सक्रियता का इंतजार कर रहा है।
मौसमीय सिस्टम दे रहे हैं मानसून को मजबूती
वर्तमान वर्षा गतिविधियां कई अनुकूल मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से हो रही हैं। अरब सागर से आने वाली नम दक्षिण-पश्चिमी हवाएं गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश तक भरपूर नमी पहुंचा रही हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश से पूर्व-मध्य अरब सागर तक उत्तर महाराष्ट्र के ऊपर से गुजरती हुई एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। वहीं दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश पर एक चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से वातावरण में अस्थिरता बढ़ी है, जिसके कारण दक्षिण-पूर्व राजस्थान, दक्षिण मध्य प्रदेश, विदर्भ तथा कोंकण एवं गोवा के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की गई है।
अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है बारिश
दक्षिण गुजरात में अगले 2 से 3 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं दक्षिण मध्य प्रदेश में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। विशेष रूप से दोपहर और शाम के समय वर्षा गतिविधियां अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। यह बारिश कृषि गतिविधियों और जल संसाधनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
मध्य और उत्तर गुजरात को अभी करना होगा इंतजार
हालांकि मानसून दक्षिण गुजरात और दक्षिण मध्य प्रदेश तक पहुंच चुका है, लेकिन मध्य गुजरात, उत्तर गुजरात, मध्य मध्य प्रदेश और उत्तर मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश के लिए अभी कुछ और समय लग सकता है। इन क्षेत्रों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि मौजूदा मौसम प्रणालियों को और मजबूत होने तथा मानसूनी प्रवाह के अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। आने वाले कुछ दिन पश्चिम और मध्य भारत में मानसून की आगे की प्रगति तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।




