पाकिस्तान से दिल्ली-यूपी तक फैला विशाल बादल समूह, अल-नीनो पर बनी नजर, क्या बदलने वाला है मानसून का हाल?
मुख्य मौसम बिंदु
- पाकिस्तान से पूर्वी भारत तक फैला विशाल बादल समूह।
- पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण से उत्तर भारत में आँधी-बारिश
- दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गर्मी से राहत।
- वर्तमान मौसम गतिविधियों का अल-नीनो से सीधा संबंध नहीं है।
ताजा उपग्रह तस्वीरों में पाकिस्तान से लेकर उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत तक फैला एक विशाल बादल समूह साफ दिखाई दे रहा है। यह बादल पट्टी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को कवर करते हुए पूर्वी भारत तथा बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौजूद बादल समूहों से जुड़ रही है। यह स्थिति उत्तरी मैदानी इलाकों में प्री-मानसून गतिविधियों के तेज होने का संकेत दे रही है।

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बना सक्रिय मौसम तंत्र
सैटेलाइट चित्रों में उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) भी दिखाई दे रहा है। यह प्रणाली एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से वायुमंडल के ऊपरी स्तरों में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे बादलों का विकास और मौसम गतिविधियां तेज हो रही हैं।
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही भरपूर नमी
मौसम प्रणाली को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से पर्याप्त नमी मिल रही है। यही कारण है कि उत्तर भारत के बड़े हिस्से में व्यापक बादल छाए हुए हैं और गरज-चमक वाले बादलों का संगठन मजबूत हो रहा है। नमी और वायुमंडलीय अस्थिरता का यह संयोजन अगले कुछ दिनों तक मौसम को सक्रिय बनाए रख सकता है।
भीषण गर्मी के बाद मिलेगी राहत
पिछले कई दिनों से उत्तर भारत के बड़े हिस्से भीषण गर्मी और लू की चपेट में थे। हालांकि अब मौसम में बदलाव के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में अगले कुछ दिनों के दौरान गरज-चमक, बिजली गिरने, धूलभरी आंधी, तेज हवाएं और छिटपुट वर्षा की संभावना है। इन गतिविधियों के चलते तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।
पर्वतीय राज्यों में भी बढ़ेगी बारिश की गतिविधियां
इस सक्रिय मौसम प्रणाली का असर केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय राज्यों में भी मध्यम से भारी वर्षा की संभावना बन रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं।
प्री-मानसून मौसम का सामान्य लेकिन सक्रिय चरण
इतने बड़े क्षेत्र में फैले बादल और लगातार बढ़ रही आंधी-बारिश की गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि उत्तर भारत प्री-मानसून के सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुका है। मानसून के आगमन से पहले इस प्रकार की वायुमंडलीय अस्थिरता और गरज-चमक वाले मौसम का बनना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
अल-नीनो से नहीं है सीधा संबंध
हालांकि प्रशांत महासागर में एल नीनो के विकसित होने को लेकर लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन वर्तमान में उत्तर भारत में दिखाई दे रही मौसम गतिविधियों का उससे कोई सीधा संबंध नहीं है। मौजूदा बारिश, बादल और आंधी-तूफान की स्थितियां मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और समुद्रों से मिल रही नमी के कारण बन रही हैं।
प्रशांत महासागर पर बनी हुई है मौसम वैज्ञानिकों की नजर
दूसरी ओर, मौसम वैज्ञानिकों की नजर प्रशांत महासागर पर भी बनी हुई है। जनवरी से समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ा है और अधिकांश जलवायु मॉडल आने वाले महीनों में एल नीनो के विकसित होने की संभावना जता रहे हैं। हालांकि वर्तमान अनुमान बताते हैं कि यदि एल नीनो मजबूत होता भी है, तो उसका अधिक प्रभाव भारतीय मानसून सीजन के बाद देखने को मिल सकता है।
मजबूत अल-नीनो का मतलब हमेशा कमजोर मानसून नहीं
ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि हर मजबूत एल नीनो के दौरान भारत में मानसून कमजोर हो, यह जरूरी नहीं है। अतीत में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं जब एल नीनो की मौजूदगी के बावजूद देश में सामान्य या सामान्य से बेहतर वर्षा दर्ज की गई। हालांकि एल नीनो मौसम की अनिश्चितताओं और चरम घटनाओं का जोखिम जरूर बढ़ा सकता है।
फिलहाल राहत की बारिश पर टिकी नजर
इस समय सबसे बड़ा और तात्कालिक मौसमीय घटनाक्रम उत्तर भारत में सक्रिय प्री-मानसून गतिविधियां हैं। अगले कुछ दिनों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का दौर उत्तर भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी को कम कर सकता है। इसलिए फिलहाल लोगों की नजर एल नीनो से ज्यादा उस राहत भरे मौसम पर रहेगी, जो जल्द ही उत्तर भारत के कई राज्यों तक पहुंच सकता है।
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