साफ दिखने वाला पानी कितना सुरक्षित? देशभर में पेयजल पर मंडराता खतरा

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Jan 14, 2026, 8:00 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • इंदौर में दूषित पानी से कई मौतें और सैकड़ों लोग बीमार
  • पाइपलाइन लीकेज से सीवेज पानी की सप्लाई में मिला
  • देश के कई शहरों में बढ़ रहे जलजनित रोग
  • जलवायु परिवर्तन से पानी दूषित होने का खतरा बढ़ा

इंदौर में पीने के पानी से जुड़ा एक गंभीर और जानलेवा संकट सामने आया है, जिसने भारत की शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। दिसंबर 2025 के अंत से अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 150 लोग गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए हैं। 30 दिसंबर तक ही 1100 से अधिक लोगों में तेज दस्त, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण देखे गए।

जांच में पता चला कि यह बीमारी भगिरथपुरा की मुख्य पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण फैली। यह पाइपलाइन एक शौचालय के नीचे से गुजर रही थी, जिससे सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। इससे ई. कोलाई, साल्मोनेला और हैजा फैलाने वाला बैक्टीरिया (विब्रियो कॉलरा) पानी में पहुंच गया। इसके बाद कई इलाकों में तेजी से जलजनित बीमारियां फैल गईं।

स्थिति को संभालने के लिए प्रभावित इलाकों की पानी की सप्लाई बंद की गई, टैंकरों से पानी पहुंचाया गया, लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई और अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया। लेकिन इस घटना के बाद नगर निगम पर गंभीर सवाल उठे। पुराने पाइप, खराब निगरानी व्यवस्था और समय पर गड़बड़ी न पकड़ पाने को लेकर प्रशासन की कड़ी आलोचना हुई। यह घटना दिखाती है कि यह सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे देश की समस्या है।

पानी दूषित होना क्या है और यह कितना खतरनाक है

पानी का दूषित होना तब होता है जब उसमें हानिकारक तत्व या जीवाणु मिल जाते हैं, जिससे वह पीने लायक नहीं रहता। सबसे खतरनाक बात यह है कि दूषित पानी अक्सर देखने में साफ, बिना गंध और सामान्य स्वाद का लगता है, जिससे खतरा समझ में नहीं आता।

पानी के दूषित होने के चार मुख्य प्रकार होते हैं।

जैविक दूषण सबसे आम है, जिसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी शामिल होते हैं, जैसे ई. कोलाई, साल्मोनेला, हैजा बैक्टीरिया, रोटावायरस और जिआर्डिया। यह आमतौर पर सीवेज लीकेज, नालियों के ओवरफ्लो, बाढ़ या खराब सफाई व्यवस्था से होता है और हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-A और गंभीर दस्त जैसी बीमारियां फैलाता है।

रासायनिक दूषण में आर्सेनिक, सीसा, नाइट्रेट, फ्लोराइड, कीटनाशक और औद्योगिक कचरा शामिल होता है। लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर, किडनी की बीमारी, दिमागी समस्याएं और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

भौतिक दूषण में मिट्टी, जंग, माइक्रोप्लास्टिक और अन्य कण शामिल होते हैं, जो पानी को मटमैला बनाते हैं और बैक्टीरिया को पनपने में मदद करते हैं।

रेडियोलॉजिकल दूषण कम होता है, लेकिन कुछ जगहों पर यूरेनियम जैसे तत्व भूजल में पाए गए हैं।

इन सभी में जैविक दूषण सबसे ज्यादा खतरनाक और आम है, खासकर शहरी इलाकों में।

भारत में और कहां फैल रहा है ऐसा खतरा

इंदौर अकेला मामला नहीं है। जनवरी 2025 से 2026 की शुरुआत तक देश के 22 राज्यों के 26 शहरों में दूषित पानी के कारण 5500 से ज्यादा लोग बीमार पड़े और कम से कम 34 लोगों की मौत हुई।

गांधीनगर, बेंगलुरु, पटना, रायपुर, चेन्नई, गुरुग्राम और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। गांधीनगर में 150 से ज्यादा बच्चे टाइफाइड से बीमार हुए। बेंगलुरु में कई इलाकों में दस्त की बीमारी फैली। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के बाद पाइपलाइन दूषित होने की घटनाएं बार-बार सामने आई हैं।

भूजल की स्थिति भी चिंताजनक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के 56% जिलों में नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा है। पश्चिम बंगाल और बिहार में आर्सेनिक की समस्या है, जबकि कई राज्यों में फ्लोराइड का खतरा फैला हुआ है। यानी शहरों और गांवों दोनों जगह पानी अब सुरक्षित नहीं रहा।

जल प्रदूषण और जल दूषण में फर्क

जल प्रदूषण और जल दूषण अलग-अलग बातें हैं। जल प्रदूषण नदियों, झीलों और भूजल स्रोतों में गंदगी मिलने को कहते हैं, जो लंबे समय तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। जल दूषण पीने के पानी की गुणवत्ता से जुड़ा होता है। पानी स्रोत पर साफ हो सकता है लेकिन पाइपलाइन या भंडारण के दौरान दूषित हो सकता है। इंदौर का मामला इसी का उदाहरण है।

भारत में पीने के पानी के मानक

भारत में पीने के पानी के लिए BIS मानक IS 10500 लागू हैं। इसके तहत ई. कोलाई बिल्कुल नहीं होना चाहिए, pH 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए, TDS 500 mg/L से कम, फ्लोराइड 1.5 mg/L से कम और नाइट्रेट 45 mg/L से कम होना चाहिए।

पानी की जांच लैब टेस्ट, पाइपलाइन में क्लोरीन जांच और निरीक्षण से होती है। लेकिन कई बार दो जांच के बीच ही बीमारी फैल जाती है। टैंकर, बोरवेल और अनियमित सप्लाई वाले इलाकों में निगरानी और भी कमजोर होती है।

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पूरे देश के लिए चेतावनी

भारत में करीब 70% बीमारियों का संबंध पानी से है। पुराने पाइप, बढ़ती आबादी और जलवायु बदलाव के कारण खतरा बढ़ रहा है। जहां पानी की सप्लाई रुक-रुक कर होती है, वहां पाइप में नेगेटिव प्रेशर बनता है और गंदगी अंदर घुस जाती है। झुग्गी बस्तियां और घनी आबादी वाले इलाके सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

जलवायु परिवर्तन खतरे को और बढ़ा रहा है

बाढ़ से नालियां और हैंडपंप दूषित हो जाते हैं। गर्मी से पानी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। अनियमित मानसून जल शोधन को प्रभावित करता है। समुद्री इलाकों में हैजा फैलाने वाले बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं। 2025 की शुरुआत में भारत ने लगभग पूरे साल चरम मौसम का सामना किया, जिससे जलजनित बीमारियां तेजी से बढ़ीं।

अपने परिवार के लिए पानी कैसे सुरक्षित रखें

संदेह होने पर पानी कम से कम एक मिनट तक उबालें। स्थानीय पानी के अनुसार RO या UV प्यूरीफायर का उपयोग करें। ओवरहेड टैंक और बर्तन नियमित साफ करें। साफ और गंदे पानी को कभी न मिलाएं। बीमारी फैलने पर प्रशासन की सलाह मानें और जांचे हुए पानी का ही उपयोग करें। याद रखें-साफ दिखने वाला पानी हमेशा सुरक्षित नहीं होता।

बड़ा संदेश

इंदौर की घटना एक चेतावनी है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो ऐसे हादसे बार-बार होंगे। सुरक्षित पेयजल आज स्वास्थ्य, जलवायु और प्रशासन-तीनों से जुड़ा सवाल बन चुका है। सवाल यह नहीं है कि अगला इंदौर कब होगा, सवाल यह है कि हम उसके लिए कितने तैयार हैं।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
With a strong foundation in science and a passion for research, Arti specializes in weather and climate communication. At Skymet Weather, she leads the company's digital content strategy, transforming complex meteorological data into clear, engaging narratives. Her research-backed storytelling has helped expand Skymet's digital reach while making weather and climate information accessible to millions of readers across India and beyond.
FAQ

नहीं, दूषित पानी कई बार दिखने में साफ होता है लेकिन उसमें खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं।

पानी उबालकर पिएं, RO/UV प्यूरीफायर इस्तेमाल करें और पानी की टंकी नियमित साफ रखें।

दस्त, उल्टी, पेट दर्द, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस A और अन्य जलजनित रोग दूषित पानी से फैल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है

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