मजबूत अल-नीनो का बढ़ता असर, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की आहट; भारत के मौसम पर क्या होगा प्रभाव?

By: Mohini Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Oct 24, 2026, 12:00 PM
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मौसम अपडेट, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • बंगाल की खाड़ी में अनुकूल परिस्थितियां चक्रवाती तूफान के विकास में मदद कर सकती हैं।
  • संभावित चक्रवाती तूफान 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल कर सकता है।
  • प्रशांत महासागर में El Niño की तीव्रता बढ़ने से भारत में बारिश का वितरण प्रभावित ।
  • सकारात्मक IOD और MJO मौसम प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं।
  • पूर्वानुमान वैधता: पूर्वानुमान 28 अक्टूबर 2026 तक की मौसमी गतिविधियों पर केंद्रित है। मौसम प्रणालियों में बदलाव होने पर अपडेट जारी किया जाएगा।

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प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा El Niño वैश्विक मौसम के साथ भारत की बारिश को लेकर भी चिंता बढ़ा रहा है। साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में कई क्षेत्रों में बारिश की कमी रही, जिससे खेती, भूजल और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा। इसी बीच बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बनने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि मजबूत El Niño और हिंद महासागर की मौजूदा परिस्थितियां भारत के मौसम को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं?

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बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बनने की संभावना

बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास अनुकूल मौसमी परिस्थितियां चक्रवाती गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में संभावित तूफान को लेकर भारत के पूर्वी तट पर नजर बनी हुई है। उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी तटीय ओडिशा सहित पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का असर हो सकता है। हालांकि, चक्रवात की तीव्रता, दिशा और तट पर संभावित प्रभाव की पुष्टि के लिए नवीनतम मौसम पूर्वानुमान जरूरी है। समुद्र का गर्म तापमान तूफान को ऊर्जा दे सकता है, लेकिन चक्रवात बनने के लिए हवा की गति, नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियां भी अनुकूल होनी चाहिए।

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El Niño रिकॉर्ड स्तर के करीब, भारत के लिए क्यों चिंता?

El Niño तब विकसित होता है, जब प्रशांत महासागर की व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ती हैं और गर्म पानी मध्य तथा पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत की ओर फैलने लगता है। 19 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों में Niño 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से 2.4°C और Niño 3 क्षेत्र का तापमान 3.5°C अधिक था। Niño 1+2 क्षेत्र में यह अंतर 4.4°C दर्ज किया गया। ये आंकड़े प्रशांत महासागर में असाधारण गर्मी का संकेत देते हैं। El Niño भारत में मानसूनी बारिश को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। 2026 में कई इलाकों में कमजोर मानसूनी बारिश के कारण खेती, भूजल रिचार्ज और जलाशयों की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

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सकारात्मक IOD और MJO से बदल सकता है मौसम का रुख

El Niño के प्रभाव को समझने में हिंद महासागर की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। 18 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का सूचकांक +0.88°C था, जो सकारात्मक चरण का संकेत देता है। सकारात्मक IOD कुछ परिस्थितियों में भारत में बारिश को समर्थन दे सकता है, लेकिन यह El Niño के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने की गारंटी नहीं है। वहीं, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बादलों, बारिश और हवाओं की गतिविधियों को प्रभावित करता है। यदि MJO की स्थिति अनुकूल रहती है, तो बंगाल की खाड़ी में संवहन और चक्रवाती सिस्टम के विकास को मदद मिल सकती है। फिर भी, चक्रवात बनने के लिए समुद्री तापमान, नमी और विंड शियर जैसे कारकों का भी अनुकूल होना जरूरी है।

भारत की बारिश और वैश्विक तापमान पर क्या होगा असर?

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मजबूत El Niño भारत में बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकता है और कुछ क्षेत्रों में पानी तथा कृषि संबंधी दबाव बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में विकसित होने वाला चक्रवाती सिस्टम पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी भारत में भारी बारिश ला सकता है। हालांकि, किसी क्षेत्र में अधिक बारिश होने से पूरे देश में मानसूनी कमी पूरी होना जरूरी नहीं है। वैश्विक तापमान भी चिंता का विषय है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 का तापमान औद्योगिक-पूर्व स्तर से 1.63°C अधिक रहा। यह बढ़ती वैश्विक गर्मी की गंभीरता दिखाता है, लेकिन किसी एक महीने के तापमान को केवल El Niño से जोड़ना सही नहीं होगा। आने वाले दिनों में प्रशांत महासागर, IOD, MJO और बंगाल की खाड़ी के सिस्टम की स्थिति भारत के मौसम के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

हरियाणा और राजस्थान में ओलावृष्टि, पहाड़ों पर बारिश थमेगी

हरियाणा और राजस्थान के कुछ जिलों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि दर्ज की गई है। इस बदलाव के पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उससे जुड़ी मौसमी परिस्थितियां अहम हो सकती हैं। अगले 24 घंटों के दौरान इन क्षेत्रों में मौसम साफ होने की संभावना है। पहाड़ी राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां जल्द कमजोर पड़ सकती हैं। इससे मौसम में धीरे-धीरे स्थिरता आने के आसार हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बादल, हल्की बारिश या तेज हवाओं की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती।

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Mohini Sharma
Content Writer
Mohini Sharma is a Content Writer at Skymet Weather Services with nearly five years of experience in journalism. At Skymet, she brings clarity and creativity to weather communication, crafting engaging news stories and updates that simplify complex weather patterns and forecasts. With her precise and relatable writing style, she helps audiences stay informed and connected to the ever-changing world of weather.
FAQ

मजबूत El Niño भारत में मानसूनी बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकता है। कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी और पानी की उपलब्धता से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं, लेकिन इसका असर सभी क्षेत्रों में समान नहीं होगा।

बंगाल की खाड़ी में अनुकूल समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां चक्रवात बनने में मदद कर सकती हैं। इसकी तीव्रता, दिशा और संभावित तटीय प्रभाव की पुष्टि नवीनतम मौसम बुलेटिन से करनी चाहिए।

सकारात्मक IOD कुछ परिस्थितियों में भारतीय मानसून को समर्थन दे सकता है, लेकिन यह El Niño के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने की गारंटी नहीं देता। बारिश का वास्तविक पैटर्न कई मौसमी कारकों पर निर्भर करता है।

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है