मानसून का जोर जारी: मुंबई में बरसेंगे बादल, अगले सात दिन तक भारी बारिश का अलर्ट
मुंबई ने अगस्त महीने में जोरदार मानसूनी बारिश का अनुभव किया। जुलाई, जो सामान्यतः सबसे अधिक बरसात वाला महीना होता है, इस बार कमजोर रहा और 840.7 मिमी के सामान्य औसत के मुकाबले सिर्फ 798.4 मिमी बारिश ही दर्ज हुई। लेकिन अगस्त ने इस कमी को पूरा किया और 15 से 20 अगस्त के बीच जबरदस्त बारिश हुई। इस दौरान तीन बार शहर ने 24 घंटे में 200 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की। अगस्त महीने में अब तक कुल 1075.5 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य 585.2 मिमी से लगभग दोगुनी है। यह पिछले 15 वर्षों में दूसरा सबसे ज्यादा अगस्त वर्षा का रिकॉर्ड है। इससे पहले अगस्त 2020 में सांताक्रुज़ वेधशाला पर 1240.1 मिमी बारिश दर्ज हुई थी।
मध्यप्रदेश का सिस्टम, पश्चिम की ओर बढ़ता हुआ
मध्य प्रदेश के मध्य भाग पर बना लो-प्रेशर क्षेत्र अब कमजोर हो चुका है, लेकिन इसका अवशेष चक्रवातीय घेरा ऊपरी स्तर तक बना हुआ है। यह सिस्टम अगले तीन दिन तक धीरे-धीरे पश्चिम की ओर खिसकते हुए वहीं डटा रहेगा। इसके बाद 2 से 5 सितंबर के बीच यह दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश, दक्षिण राजस्थान और उत्तर गुजरात के त्रि-जंक्शन पर पहुंच जाएगा। इस सिस्टम की स्थिति कोकण क्षेत्र और खासकर मुंबई में भारी वर्षा के लिए अनुकूल मानी जाती है।
बंगाल की खाड़ी से नया सिस्टम और ‘डम्बल इफेक्ट’
इसी बीच, 1–2 सितंबर को उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर एक और लो-प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। जब मानसून ट्रफ के दोनों सिरों पर चक्रवातीय गतिविधियां सक्रिय होती हैं तो इसे ‘डम्बल इफेक्ट’ कहा जाता है। यह स्थिति दोनों सिस्टम को मजबूत करती है और मानसून की गति व ताकत को और बढ़ा देती है। ऐसे में मुंबई और उपनगरों में बारिश की तीव्रता और तेज हो जाएगी।
आगामी मौसम: त्योहारों पर असर की आशंका
29 और 30 अगस्त को रुक-रुक कर मध्यम बारिश के साथ बीच-बीच में हल्की धूप की संभावना है। हालांकि एक-दो स्थानों पर कम अवधि की भारी बौछारें हो सकती हैं। 31 अगस्त और 1 सितंबर को हल्की से मध्यम और कुछ जगहों पर तेज बारिश होगी। 2 से 5 सितंबर के बीच वर्षा की तीव्रता और बढ़ेगी और भारी बारिश व गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी। इस दौरान संचार व यातायात प्रभावित हो सकता है और गणेश उत्सव के आयोजन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
6 सितंबर के बाद राहत
6 सितंबर के बाद मौसम में सुधार शुरू होगा। उस समय तक सक्रिय सिस्टम गुजरात और राजस्थान से खिसककर दक्षिण पाकिस्तान की ओर चला जाएगा। जिससे कोकण तट, खासकर मुंबई को राहत मिलेगी।






