2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई समय से पहले, बदलने लगा मौसम

By: skymet team | Edited By: skymet team
Sep 17, 2025, 6:15 PM
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मानसून 2025 अपडेट

दक्षिण-पश्चिम मानसून 2025 की विदाई 14 सितंबर से पश्चिम राजस्थान से शुरू हुई, जो तय समय से तीन दिन पहले है। मानसून वापसी की शुरुआत राजस्थान की सीमा वाले इलाकों बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और गंगानगर से हुई। 16 सितंबर को मानसून पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी पीछे हट गया। फिलहाल मानसून विदाई की रेखा भटिंडा, फतेहाबाद, पिलानी, अजमेर, डीसा और भुज से होकर गुजर रही है। इस हफ्ते उत्तरी मैदानी हिस्सों और आंशिक रूप से पहाड़ी इलाकों से भी मानसून के पीछे हटने की संभावना है।

मानसून की तिथियों में बदलाव

मानसून की शुरुआत और विदाई की तिथियाँ साल 2020 में संशोधित की गईं थी। इसके लिए 1961–2019 (आगमन) और 1971–2019 (विदाई) के आँकड़े लिए गए। पहले ये तिथियाँ 1901–40 के पुराने आंकड़ों पर आधारित थीं, जो केवल 149 ज़मीनी स्टेशनों से प्राप्त किए गए थे। मौजूदा मानदंड 2006 से लागू है, जिसके तहत 1 सितंबर के बाद ही मानसून की विदाई घोषित की जा सकती है।

मानसून विदाई की सामान्य तिथियाँ

मानसून विदाई की सामान्य तिथियाँ

मानसून विदाई तय करने के प्रमुख संकेत

मानसून की विदाई की घोषणा कुछ प्रमुख परिस्थितियों पर आधारित होती है:

• लगातार पाँच दिन तक क्षेत्र में बारिश का पूरी तरह थम जाना।

• निचले वायुमंडल (850 hPa तक) में एंटीसाइक्लोन का बनना।

• सैटेलाइट वॉटर वेपर इमेज और टेफिग्राम से नमी की भारी कमी होना।

इसके बाद देशभर में विदाई की घोषणा की जाती है, जब नमी में कमी, लगातार शुष्क मौसम और स्थानिक (spatial) निरंतरता साफ दिखे। दक्षिणी प्रायद्वीप से और पूरे देश से मानसून की विदाई हमेशा 1 अक्टूबर के बाद ही मानी जाती है।

विदाई का मतलब बारिश का अंत नहीं

किसी क्षेत्र से मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं कि आगे बिल्कुल बारिश नहीं होगी। अक्सर उत्तरी भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण विदाई के बाद भी हल्की बारिश हो जाती है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा और दक्षिण-मध्य भारत में मानसून की विदाई अक्टूबर के दूसरे हफ्ते तक खिंच जाती है। कई बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और उत्तर-पूर्व मानसून की शुरुआत एक साथ हो जाती है।

विदाई के बाद का मौसम और दूसरी गर्मी

उत्तर और पश्चिम भारत से मानसून की विदाई के बाद ‘दूसरी गर्मी’ शुरू होती है। राजस्थान और गुजरात में तापमान फिर से उछलकर 38–40 डिग्री तक पहुँच जाता है। बाड़मेर, जैसलमेर, फालोदी, बीकानेर, गंगानगर, भुज, नलिया, डीसा और पाटन जैसे शहर अक्टूबर के पहले हफ्ते में 40°C पार कर देते हैं।

विदाई के बाद पश्चिम, उत्तर और मध्य भारत में साफ मौसम का दौर नवंबर तक चलता है। हाँ, इस दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर पर चक्रवातों का खतरा बना रहता है, जिसमें बंगाल की खाड़ी में अधिक चक्रवात बनते हैं।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है