Uttarakhand Heavy Rain: देहरादून में मूसलाधार बारिश और बादल फटने से तबाही, टपकेश्वर मंदिर डूबा, चंद्रभागा नदी उफान पर
देहरादून के पर्यटन स्थल सहस्त्रधारा में सोमवार देर रात बादल फटने जैसी घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। रात करीब साढ़े 11 बजे अचानक मूसलधार बारिश हुई और देखते ही देखते बाजार मलबे से पट गया। कई होटल और दुकानें ध्वस्त हो गए, जबकि सौ से अधिक लोग फंस गए थे। हालांकि स्थानीय लोगों और प्रशासन ने मिलकर सभी को सुरक्षित निकाल लिया। इस आपदा के साथ ही मसूरी, नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में भी भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
क्या है बादल फटने का कारण
Skymet Weather के अनुसार, इस समय उत्तराखंड पर कई मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं। जैसे पूर्वी विदर्भ और बिहार पर बने चक्रवाती परिसंचरण से बड़ी मात्रा में नमी उत्तर भारत की ओर बढ़ रही है। बंगाल की खाड़ी से भी नमी लगातार पहाड़ों तक पहुँच रही है। नमी से लदे बादल पहाड़ों से टकराकर अचानक तेज वर्षा कराते हैं, जिसे ओरोग्राफिक प्रभाव कहते हैं। यही कारण है कि देर रात सहस्त्रधारा में बेहद कम समय में अत्यधिक वर्षा हुई और बादल फटने जैसी स्थिति बनी। विशेषज्ञों के अनुसार, “सितंबर के आखिर में मानसून की विदाई का समय नजदीक होता है। ऐसे दौर में स्थानीय स्तर पर बनने वाले तूफानी बादल कई बार बेहद खतरनाक बारिश कराते हैं। सहस्त्रधारा में हुई घटना इसी का परिणाम है।”
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सहस्त्रधारा में तबाही का मंजर
सोमवार रात 11:30 बजे के आसपास सहस्त्रधारा के मुख्य बाजार में अचानक तेज बारिश और मलबे का सैलाब उतर आया। चंद मिनटों में ही दो से तीन बड़े होटल और सात से आठ दुकानें जमींदोज हो गईं। इलाके में मौजूद करीब 100 लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे लेकिन स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए सभी को सुरक्षित निकाल लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेज गर्जन-तड़ित के साथ मूसलधार बारिश अचानक शुरू हुई और बाजार मलबे में बदल गया। कई वाहन भी बह गए। वहीं, रिस्पना और चंद्रभागा नदियों में जलस्तर काफी बढ़ गया है।
रेस्क्यू में देरी, लेकिन बचाई गई जानें
आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक, देर रात करीब 2 बजे SDRF और फायर ब्रिगेड की टीमों को मौके पर भेजा गया। हालांकि रास्ते में भारी मलबा होने की वजह से वे तुरंत नहीं पहुँच पाए। PWD की JCB मशीनों ने घंटों मशक्कत के बाद रास्ता खोला। तब जाकर राहत कार्य आगे बढ़ा। फिलहाल, एक-दो लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई है और उनकी तलाश जारी है। देहरादून के साथ-साथ मसूरी में भी बारिश ने कहर बरपाया। झड़ीपानी क्षेत्र में देर रात मजदूरों के कच्चे मकान पर मलबा आ गिरा। हादसे में एक मजदूर की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है।
टपकेश्वर मंदिर और आईटी पार्क में संकट
देहरादून का टपकेश्वर मंदिर भी इस आपदा से अछूता नहीं रहा। तमसा नदी के उफान में मंदिर परिसर जलमग्न हो गया और शिवलिंग पानी में डूब गया। श्रद्धालुओं को तुरंत मंदिर से बाहर निकाल लिया गया और इलाके को खाली कराया गया। आईटी पार्क क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा आ जाने से सोंग नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। पुलिस ने आसपास के लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। वहीं, देहरादून के पौंधा इलाके में देवभूमि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में करीब 200 छात्र-छात्राएं बारिश और जलभराव में फंस गए थे। SDRF की टीम मौके पर पहुँची और सभी छात्रों को सुरक्षित निकाल लिया।
मसूरी-देहरादून मार्ग बाधित, नैनीताल में स्कूल बंद
देहरादून की रिस्पना नदी भी तेज बारिश से उफान पर है। भारी बारिश और मलबे की वजह से मसूरी-देहरादून मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कोलू खेत इलाके में सड़क का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया है। कई होटल, दुकानें और घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। पुल और सड़कें टूट जाने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। आवाजाही ठप हो गई है और लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं। लगातार बारिश को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। जिलाधिकारी वंदना सिंह ने कहा कि खराब मौसम में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पहाड़ी इलाकों में अगले 24 घंटे अहम
अगले 24 घंटे उत्तराखंड के लिए चुनौतीपूर्ण होंगे। पहाड़ी जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। नदियों और नालों का जलस्तर और बढ़ सकता है। देहरादून, मसूरी, नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है। मानसून की विदाई का समय करीब है लेकिन इस दौरान पहाड़ों में ऐसी घटनाएँ सामान्य से ज्यादा देखने को मिलती हैं। लगातार नमी की आपूर्ति और पहाड़ी ढलानों पर बादलों की टकराहट से अचानक बादल फटने जैसी परिस्थितियाँ बन जाती हैं। उत्तराखंड में हर साल मानसून के दौरान बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएँ सामने आती हैं। सहस्त्रधारा और मसूरी में हुई तबाही ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पहाड़ी इलाकों में आपदा प्रबंधन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
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प्रशासन की अपील
देहरादून पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारे न जाएँ और सतर्क रहें। प्रशासन ने राहत शिविर भी बनाए हैं, जहाँ प्रभावित लोगों को भोजन और आश्रय दिया जा रहा है।
















