दिल्ली-एनसीआर में दमघोंटू प्रदूषण, सांस लेना हुआ मुश्किल, ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचा AQI
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है। अधिकतर निगरानी केंद्रों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से ऊपर दर्ज किया गया है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से करीब 30 गुना ज्यादा और भारत के मानक से 8 गुना अधिक है।
प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण
राजधानी में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं — वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, कम हवा की गति, गिरता तापमान, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना। इन सभी कारणों से प्रदूषक तत्व ज़मीन के पास फंस गए हैं, जिससे घना स्मॉग (धुंध) छा गया है और दृश्यता (visibility) बेहद कम हो गई है।
सरकार की सख्त कार्रवाई – लागू हुआ GRAP-III
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP-III) का तीसरा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध, कारखानों से निकलने वाले धुएं की कड़ी जांच, और लोगों को बाहर कम निकलने की सलाह जैसे कदम उठाए गए हैं।
स्वास्थ्य पर असर और विशेषज्ञों की चेतावनी
प्रदूषण के कारण दिल्ली के लोग आंखों में जलन, सिरदर्द, और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति हृदय (cardiovascular) और श्वसन (respiratory) बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
सावधानियाँ और लोगों के लिए सुझाव
लोगों को सलाह दी गई है कि वे N95 मास्क पहनें, अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें ताकि जहरीली हवा के असर को कम किया जा सके। यह स्थिति राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में चिंता का विषय बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की गति बढ़ने या बारिश होने पर ही कुछ राहत मिल सकती है।
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