उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश के आसार, जानें किस दिन होगी शुरुआत

By: Skymet team | Edited By:
Jan 20, 2025, 4:30 AM
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उत्तर भारत में बारिश, फोटो-Canva

उत्तर-पश्चिम भारत में इस सर्दियों के मौसम में लगातार पश्चिमी विक्षोभ आए हैं, खासकर दिसंबर 2024 में। इन पश्चिमी विक्षोभ की श्रृंखला से पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानों में बारिश हुई। हालांकि, जनवरी में इन विक्षोभों की तीव्रता कम हो गई, जिससे मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला।

जनवरी में वर्षा की 61% की कमी: 1 जनवरी से 19 जनवरी के बीच देश में 61% की वर्षा की कमी रही, जिसमें उत्तर-पश्चिम भारत को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा, क्योंकि यहां 68% बारिश की कमी दर्ज हुई। इसके बावजूद, कुछ इलाकों में अलग-अलग स्तर की बारिश हुई। हरियाणा में 22% अधिक वर्षा हुई, जबकि चंडीगढ़ में 18% की बारिश की अधिकता दर्ज की गई। वहीं, राजस्थान में भी भारी बारिश हुई, जिससे वहां 62% की अधिकता देखी गई।

बिखरी हुई हल्की बारिश ने दी राहत: जनवरी 2025 में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे उत्तर-पश्चिमी भारत के कई इलाकों में कई बार हल्की बारिश हुई है। यह बारिश मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान व आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवातीय परिसंचरणों के कारण हुई। बारिश हल्की थी, लेकिन शुष्क मौसम से थोड़ी राहत जरूर मिली।

पश्चिमी विक्षोभ से बारिश की संभावना: 22 जनवरी को एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय पहुंचेगा। जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 22 और 23 जनवरी को होने वाली बारिश भारी नहीं होगी, लेकिन दिल्ली, पश्चिमी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में एक या दो बार तेज बारिश हो सकती है। इस बारिश से क्षेत्र में अधिकतम तापमान कुछ हद तक कम होने की संभावना है, जिससे हाल ही में देखे गए असामान्य गर्म मौसम से थोड़ी राहत मिलेगी।

न्यूनतम तापमान में गिरावट के आसार: पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद बारिश का दौर समाप्त हो जाएगा। फिर 24 जनवरी के बाद न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना है। हालांकि, इस बारिश के बाद एक सप्ताह तक शुष्क मौसम रहने की उम्मीद है। जिससे उत्तरी मैदानी इलाकों में फिर से शुष्क मौसम की परिस्थितियाँ लौट आएंगी।

किसानों और निवासियों के लिए राहत: हालांकि, 22 और 23 जनवरी को होने वाली बारिश इतनी अधिक नहीं होगी कि क्षेत्र में बड़ी जल कमी को दूर कर सके। लेकिन यह शुष्क मौसम को तोड़ कर उत्तर-पश्चिम भारत के किसानों और निवासियों को कुछ राहत देगी। अगले सप्ताह के दौरान मौसम पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव और उसके बाद लौटने वाले शुष्क हालात से प्रभावित रहेगा।

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Skymet team

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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