आंध्र प्रदेश के तट से टकराया चक्रवात मुरासु ,गहरे दबाव में बदलेगा, 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Nov 3, 2026, 1:45 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • चक्रवात मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच तट को पार किया।
  • नेल्लोर, ओंगोल, बापटला, गुंटूर और प्रकाशम सबसे अधिक प्रभावित जिले रहे।
  • लैंडफॉल के दौरान चक्रवात के हवाओं की रफ्तार लगभग 150 किमी प्रति घंटे तक पहुंची।
  • तेलंगाना के खम्मम, नलगोंडा, महबूबाबाद, सूर्यापेट और वारंगल को प्रभावित हो सकते हैं।
  • Forecast Validity: 3 से 5 नवंबर 2026 तक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इसके बाद मौसम साफ हो सकता है

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चक्रवात 'अर्नब' के बाद बहुत कम समय के अंतराल पर एक और चक्रवाती तूफान ने आंध्र प्रदेश के तट को प्रभावित किया है। इससे पहले 28 अक्टूबर 2026 को चक्रवात अर्नब ने नरसापुर के पास आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक दी थी। अब चक्रवात 'मुरासु' ने आज यानी 3 नवंबर की सुबह तड़के ओंगोल के पास तट को पार किया। यह श्रेणी-2 के बराबर ताकत वाला चक्रवाती तूफान था, जिसकी हवाओं की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी।

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मुरासु के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के पांच तटीय जिलों में अत्यधिक भारी बारिश हुई। इस दौरान तेज और झोंकेदार हवाएं भी चलीं। तूफान को तट पार करने में दो घंटे से अधिक का समय लगा। इसकी लैंडफॉल प्रक्रिया सुबह 3:30 बजे शुरू हुई और 5:30 बजे तक जारी रही। इस दौरान तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया।

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12 किलोमीटर का 'आई' और 150 किमी/घंटा तक पहुंची हवाएं, अब कमजोर होगा मुरासु

चक्रवात मुरासु जब तट के करीब पहुंचा, तब इसका आंतरिक हिस्सा काफी सघन और मजबूत था। इसके गोलाकार बादलों के घने घेरे (Central Dense Overcast यानी CDO) के बीच तूफान की आंख (Eye) भी स्पष्ट रूप से मौजूद थी। इस आंख का व्यास लगभग 12 किलोमीटर था। चक्रवात के बीच में बनने वाला यह हिस्सा उसकी ताकत और नुकसान पहुंचाने की क्षमता को दर्शाता है। तूफान ने भीषण चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) के रूप में तट पार किया। इसके आंतरिक हिस्से में हवाओं की रफ्तार लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई।

समुद्र की सतह का तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच था। समुद्र का यह गर्म तापमान चक्रवात को ऊर्जा देने और उसकी ताकत बनाए रखने में मददगार रहा। हालांकि, अब तूफान के जमीन के ऊपर पहुंचने से इसकी ताकत धीरे-धीरे कम होने लगेगी। जमीन से टकराने और आगे बढ़ने के कारण इसे समुद्र से मिलने वाली नमी और ऊर्जा में कमी आएगी। अनुमान है कि 3 नवंबर की देर दोपहर तक यह कमजोर होकर सामान्य उष्णकटिबंधीय तूफान (Tropical Storm) बन जाएगा। देर रात तक इसके गहरे दबाव के क्षेत्र या दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। इसके बाद 4 नवंबर की सुबह तक यह निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है। इस पूरी अवधि में तूफान जमीन के ऊपर उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।

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आंध्र प्रदेश के 5 तटीय जिलों में भारी बारिश, तेलंगाना और आसपास के राज्यों में भी असर

चक्रवात मुरासु का सबसे अधिक असर आंध्र प्रदेश के पांच तटीय जिलों नेल्लोर, ओंगोल, बापटला, गुंटूर और प्रकाशम में देखने को मिला है। पिछले 24 घंटों में बापटला में सबसे अधिक 222 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि ओंगोल में इसी अवधि के दौरान 120 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा नेल्लोर से लेकर पूर्वी गोदावरी तक का पूरा तटीय क्षेत्र तूफान से प्रभावित हुआ। मछलीपट्टनम, काकीनाडा, तुनी और नरसापुर जैसे इलाकों में भी भारी बारिश हुई। खास बात यह है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर इन तटीय इलाकों को दूसरी बार भारी बारिश का सामना करना पड़ा है।

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तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियां अगले करीब 24 घंटों तक जारी रह सकती हैं। इसके बाद खराब मौसम की तीव्रता में कुछ कमी आने की संभावना है। चक्रवात के कमजोर होने के बावजूद इसका असर आसपास के राज्यों में बना रहेगा। तूफान गुंटूर और विजयवाड़ा के रास्ते आगे बढ़ते हुए तेलंगाना तक पहुंच सकता है। तेलंगाना के खम्मम, नलगोंडा, महबूबाबाद, सूर्यापेट और वारंगल जिलों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

4 नवंबर की सुबह तक चक्रवात के निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना है। इसके बाद तेलंगाना, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के आसपास के क्षेत्रों में काफी बड़े हिस्से में मध्यम तीव्रता की बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इन क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियां अगले करीब 48 घंटों तक बनी रह सकती हैं। इसके बाद यानी लगभग 5 नवंबर से इन राज्यों में मौसम साफ होने की संभावना है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

चक्रवात मुरासु ने 3 नवंबर 2026 की सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। लैंडफॉल के दौरान तूफान की हवाओं की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी।

नेल्लोर, ओंगोल, बापटला, गुंटूर और प्रकाशम सबसे अधिक प्रभावित हुए। बापटला में 222 मिमी और ओंगोल में 120 मिमी बारिश दर्ज की गई।

चक्रवात के कमजोर होकर आगे बढ़ने से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। लगभग 48 घंटे बाद मौसम साफ होने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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