केरल में अगले 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट, कोच्चि से तिरुवनंतपुरम तक बरसात, जानें 5 नवंबर तक कैसा रहेगा मौसम
मुख्य मौसम बिंंदु
- केरल में 4 नवंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी है।
- 2 से 4 नवंबर के बीच मध्यम से भारी बारिश और कहीं-कहीं तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
- 5 नवंबर को भी गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना है।
- लगातार बारिश से खेतों, जल निकासी व्यवस्था और यातायात पर असर पड़ सकता है।
- Forecast Validity: यह पूर्वानुमान 5 नवंबर 2026 तक के लिए है। इस दौरान बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
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केरल में भारी बारिश और गरज-चमक का दौर अभी जारी रहने वाला है। राज्य में 4 नवंबर तक कई दिनों के लिए भारी बारिश का अलर्ट बना हुआ है। स्काईमेट के अनुसार, सोमवार, मंगलवार और बुधवार यानी 2 से 4 नवंबर के दौरान केरल में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 5 नवंबर को भी गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में अचानक तेज बारिश, बिजली गिरने और खुले स्थानों पर काम करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस चेतावनी का मतलब यह नहीं है कि पूरे केरल में लगातार बारिश होगी या राज्य में बाढ़ की स्थिति बनने की पुष्टि हो गई है।
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आंध्र प्रदेश से अलग है केरल में बारिश का कारण
केरल में बारिश की यह स्थिति आंध्र प्रदेश के पास चक्रवात के संभावित तट से टकराने जैसी नहीं है। आंध्र प्रदेश में चक्रवात का सीधा खतरा है, जबकि केरल में व्यापक स्तर पर गरज-चमक वाले बादलों के कारण बारिश होने का अनुमान है। फिलहाल उपलब्ध चेतावनी में केरल के ऊपर किसी अलग कम दबाव वाले क्षेत्र की पुष्टि नहीं की गई है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि चक्रवात मुरासु का मुख्य हिस्सा केरल के ऊपर से गुजरेगा। वातावरण में नमी का एक जगह इकट्ठा होना और हवा में अस्थिरता बढ़ना मजबूत बारिश वाले बादलों को विकसित कर सकता है। इसके अलावा, पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराकर नम हवाएं ऊपर उठती हैं, जिससे पहाड़ी इलाकों में बारिश बढ़ सकती है। बारिश के पीछे किसी विशेष मौसम प्रणाली की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए नए क्षेत्रीय मौसम विश्लेषण की जरूरत होगी।
2 से 4 नवंबर के बीच रुक-रुककर होगी बारिश
अगले तीन दिनों के दौरान केरल में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर बारिश तेज हो सकती है, लेकिन पूरे दिन एक जैसी बारिश होने का अनुमान नहीं है। फिलहाल यह बताना मुश्किल है कि किस जिले में बारिश किस समय शुरू होगी, कितनी देर तक चलेगी और कितनी मात्रा में होगी। इसलिए तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और पहाड़ी जिलों के लिए अलग-अलग स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है। गरज-चमक वाले बादल तेजी से विकसित हो सकते हैं। ऐसे में एक इलाके में अचानक तेज बारिश हो सकती है, जबकि पास के दूसरे इलाके में मौसम सामान्य बना रह सकता है। इसलिए कम समय के लिए जारी होने वाले ताजा मौसम अलर्ट (Nowcast) भी महत्वपूर्ण होंगे।
लगातार बारिश से जलभराव और खेती पर पड़ सकता है असर
लगातार कई दिनों तक बारिश का अलर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बार-बार होने वाली बारिश से एक ही इलाके की नालियों, जल निकासी व्यवस्था और खेतों पर असर पड़ सकता है। कहीं जलभराव होगा या नहीं, यह पहले हुई बारिश, मिट्टी में मौजूद नमी और एक जगह बारिश वाले बादलों के रुकने की अवधि पर निर्भर करेगा। इसलिए बारिश के बीच कुछ समय का ब्रेक मिलने का मतलब यह नहीं है कि बारिश का दौर पूरी तरह खत्म हो गया है। वहीं, केवल भारी बारिश के अलर्ट के आधार पर नदियों में बाढ़ आने या पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन होने की पक्की आशंका भी नहीं जताई जा सकती।
किसानों को सलाह है कि कटी हुई फसल और उपज को सुरक्षित रखें। जहां सुरक्षित हो, वहां खेतों और आसपास की नालियों में पानी की निकासी का ध्यान रखें। गरज-चमक वाले बादल आने पर फसलों में दवा का छिड़काव टाल दें। वाहन चालकों को पानी से भरी सड़कों पर जाने से बचना चाहिए, क्योंकि तेज बारिश के दौरान दृश्यता कम हो सकती है। खुले स्थानों पर काम करने वाले लोग बादलों की गरज सुनते ही किसी मजबूत और सुरक्षित जगह पर चले जाएं, बारिश तेज होने का इंतजार न करें। पश्चिमी घाट के पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वालों को स्थानीय प्रशासन की सड़क संबंधी सलाह का पालन करना चाहिए। समुद्र में जाने वाले लोगों को रवाना होने से पहले ताजा तटीय मौसम बुलेटिन जरूर देखना चाहिए। यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में बदला मौसम, सुबह हल्का कोहरा और दिन में खिली रहेगी धूप, जानें कितना गिरेगा तापमान















