बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर दबाव क्षेत्र, तटीय राज्यों में बदल सकता है मौसम का मिजाज

By: skymet team | Edited By: skymet team
Apr 7, 2025, 8:32 PM
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बंगाल की खाड़ी में कम दबाब क्षेत्र, प्रतिकात्मक फोटो

उत्तर अंडमान सागर और उससे सटे बंगाल की खाड़ी पर बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के प्रभाव से दक्षिण-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) बन गया है। यह इस मौसम का पहला लो प्रेशर सिस्टम है, लेकिन अभी यह कमजोर और सीमित प्रभाव वाला दिखाई दे रहा है। इसे अगले 48 घंटों तक बारीकी से मॉनिटर करने की आवश्यकता है।

उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा सिस्टम, फिलहाल तटों पर कोई खतरा नहीं

यह सिस्टम अगले 24 घंटों में दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी की ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और सप्ताह के मध्य तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाएगा। फिलहाल अगले 2-3 दिनों तक आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों पर इसका कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा और मौसम की गतिविधियाँ समुद्र क्षेत्र तक ही सीमित रहेंगी।

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विस्तृत क्षेत्र में फैला है चक्रवातीय घेरा

इस लो प्रेशर सिस्टम का चक्रवातीय घेरा दक्षिण और मध्य बंगाल की खाड़ी के बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका अक्ष (axis) उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की दिशा में झुका हुआ है। अगले 24 घंटों में यह परिसंचरण थोड़ा और स्पष्ट हो सकता है, लेकिन इसका मुख्य प्रभाव समुद्र के ऊपर ही बना रहेगा, खासतौर पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से कुछ दूरी पर।

9 से 11 अप्रैल के बीच पूर्वी तटीय राज्यों में बारिश की संभावना

9 से 11 अप्रैल के दौरान पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं, उत्तर-पूर्व भारत में इस दौरान बारिश की तीव्रता और विस्तार दोनों बढ़ जाएंगे। इस दौरान प्री-मानसून गतिविधियों में स्पष्ट उछाल देखने को मिलेगा।

12 से 14 अप्रैल के बीच अंदरूनी क्षेत्रों में बारिश

12 से 14 अप्रैल के बीच यह सिस्टम अंदरूनी क्षेत्रों तक असर डालेगा। बंगाल की खाड़ी और पूर्वी तट पर बने विभिन्न मौसमीय सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से दक्षिण और पूर्वी भारत में प्री-मानसून गतिविधियों की रफ्तार तेज होगी। यह सिलसिला अगले सप्ताह दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में भी जारी रह सकता है।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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