मौसम में बड़ा बदलाव: बैक-टू-बैक पश्चिमी विक्षोभ से कई राज्यों में प्री-मानसून आँधी-बारिश के आसार

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Mar 12, 2026, 1:58 PM
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उत्तर भारत में बढ़ेगी प्री-मॉनसून बारिश

मुख्य मौसम बिंदु

  • लंबे समय बाद जम्मू, पंजाब और तराई क्षेत्रों में हल्की प्री-मॉनसून बारिश दर्ज।
  • 14 मार्च को नया पश्चिमी विक्षोभ, कई राज्यों में हल्की बारिश की संभावना।
  • 17 मार्च के बाद मजबूत सिस्टम से आंधी, तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा।
  • 18–20 मार्च के बीच उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में मौसम बदल सकता है।

पिछले कुछ समय से आने वाले पश्चिमी मौसम तंत्र उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों को लगभग पूरी तरह से प्रभावित नहीं कर पाए, जिसके कारण उत्तर भारत के अधिकांश मैदान सूखे बने रहे। हालांकि अब लंबे अंतराल के बाद एक पश्चिमी सिस्टम के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों और जम्मू-पंजाब के तराई इलाकों में हल्की और बिखरी हुई बारिश दर्ज की गई है। बीती रात जम्मू, कठुआ, उधमपुर, पठानकोट और अमृतसर में इस सीजन की पहली प्री-मॉनसून बारिश हुई। आज यह गतिविधि आगे बढ़कर पंजाब और हरियाणा के उत्तरी हिस्सों तथा चंडीगढ़ तक पहुंच सकती है। हालांकि यह मौसम प्रणाली देर रात या कल सुबह तक मैदानी इलाकों से आगे निकल जाएगी।

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14 मार्च को नया पश्चिमी विक्षोभ, कई राज्यों में हल्की बारिश संभव

14 मार्च की रात एक और पश्चिमी विक्षोभ के पश्चिमी हिमालय तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ उत्तर राजस्थान और आसपास के पंजाब क्षेत्र में एक छोटा चक्रवाती परिसंचरण भी बन सकता है। इसी परिसंचरण से एक पूर्व-पश्चिम दिशा में फैली ट्रफ रेखा दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश तक जाएगी, जो दिल्ली के करीब रहेगी। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तर मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बिखरी हुई बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। यह मौसम गतिविधि बहुत व्यापक या तीव्र नहीं होगी, लेकिन इतनी जरूर होगी कि उत्तर भारत में तेजी से बढ़ते तापमान की रफ्तार पर कुछ हद तक रोक लग सके।

17 मार्च के बाद मजबूत सिस्टम, कई राज्यों में आंधी-बारिश की संभावना

17 मार्च के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालय की ओर बढ़ेगा, जो पहले वाले सिस्टम की तुलना में अधिक मजबूत माना जा रहा है। इसके साथ मैदानी इलाकों में प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है, जिससे मौसम गतिविधियों का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ सकते हैं। 18 से 20 मार्च के बीच राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश इस सिस्टम के प्रभाव में आ सकते हैं। इसके बाद लगभग 24 घंटे की देरी से यह गतिविधि मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों तक पहुंचेगी और आगे बढ़कर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी असर दिखा सकती है। इस दौरान प्री-मॉनसून के सामान्य खतरे जैसे गरज-चमक, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि प्री-मॉनसून के दौरान तीन दिन से ज्यादा आगे का मौसम अनुमान कम भरोसेमंद होता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर इस पूर्वानुमान की समीक्षा और संशोधन किया जा सकता है। इसके बावजूद यह माना जा सकता है कि देश के बड़े हिस्सों में प्री-मॉनसून गतिविधियों की शुरुआत होने जा रही है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां हो रही हैं।

14 मार्च के आसपास हल्की बारिश की संभावना है, जबकि 18–20 मार्च के बीच गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हाँ, इन मौसम प्रणालियों के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है और बढ़ती गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है