पूर्वोत्तर भारत में सप्ताह भर बारिश के आसार, असम-मेघालय और अरुणाचल में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू
मुख्य मौसम बिंदु
- पूर्वोत्तर भारत में मार्च के पहले दस दिनों में बारिश 79% कम रही।
- असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और म्यांमार सीमा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित।
- अगले सप्ताह प्री-मॉनसून गतिविधियां तेज होंगी, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना।
- लगातार बारिश से भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा, सतर्क रहने की सलाह।
इस बार सर्दियों के मौसम में पूरे पूर्वोत्तर भारत में बारिश काफी कम रही। मार्च के पहले दस दिनों के दौरान भी वर्षा की स्थिति कमजोर ही बनी रही। 1 से 10 मार्च के बीच पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से लगभग 79 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। असम और मेघालय के अधिकांश हिस्सों, अरुणाचल प्रदेश तथा म्यांमार की सीमा से लगे उप-क्षेत्रों में वर्षा की कमी काफी ज्यादा रही है। हालांकि पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें देखने को मिली हैं। अब मौसम विभाग के अनुसार पूरे क्षेत्र में अगले एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक प्री-मॉनसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
कई मौसम प्रणालियों से बढ़ेगी प्री-मॉनसून गतिविधि
पूर्वोत्तर भारत में मौसम गतिविधियों के लिए कई अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। असम और अरुणाचल प्रदेश के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके अलावा बांग्लादेश और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल के आसपास भी एक और चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन दोनों प्रणालियों को पूर्वी बंगाल की खाड़ी और म्यांमार के आसपास बने प्रतिचक्रवाती हवाओं के क्षेत्र से भी मदद मिल रही है। यह प्रणाली बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाओं को लगातार पूर्वोत्तर भारत की ओर भेज रही है, जिससे पूरे इलाके में बादल और बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
कई राज्यों में तेज आंधी-बारिश और भूस्खलन का खतरा
मौसम की यह गतिविधि शुरुआत में असम घाटी, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल में ज्यादा प्रभावी रहेगी। इसके बाद यह मेघालय और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा त्रिपुरा के पूर्वी हिस्सों तक फैल सकती है। इस क्षेत्र में आमतौर पर देर रात और सुबह के समय मौसम गतिविधियां ज्यादा तेज हो जाती हैं। सिक्किम, सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और मेघालय ऐसे क्षेत्र हैं जहां इस दौरान खराब मौसम की स्थिति अक्सर ज्यादा देखी जाती है। इस समय तेज गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं भी ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं। लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे सड़कों और राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। इसलिए लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित यात्रा करने की सलाह दी गई है।
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