शरद विषुव 2025: उत्तरी गोलार्ध में आज से ‘पतझड़’ की शुरुआत
सौर विषुव (Solar Equinox) वह खगोलीय घटनाहै जब सूर्य ठीक भूमध्य रेखा (Equator) के ऊपर दिखाई देता है। इस दिन सूर्य न उत्तर की ओर होता है, न दक्षिण की ओर। विषुव (इक्विनॉक्स) के दिन सूर्य पूर्व से उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। यह साल में दो बार 20 मार्च और 23 सितंबर को होता है।
मार्च और सितंबर के इक्विनॉक्स(विषुव)
सितंबर में सूर्य उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध की ओर जाता है। वहीं, मार्च में सूर्य दक्षिणी गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर आता है। 20 मार्च को इसे "वसंत विषुव" या "स्प्रिंग इक्विनॉक्स" कहते हैं, क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत का संकेत है। इसे उत्तर की ओर जाने वाला इक्विनॉक्स (Northward Equinox) भी कहा जाता है।
इक्विनॉक्स का खगोलीय महत्व
विषुव(Solar Equinox) पूरे दिन की घटना नहीं है, बल्कि केवल उस क्षण होती है जब सूर्य आकाशीय भूमध्य रेखा (Celestial Equator) को पार करता है। उत्तरी गोलार्ध में सितंबर का इक्विनॉक्स "पतझड़ विषुव" कहलाता है। यह गर्मी के अंत और शरद ऋतु (Autumn) की शुरुआत का संकेत देता है। शरद ऋतु दिसंबर संक्रांति (December Solstice) तक रहती है, जिसके बाद खगोलीय सर्दी शुरू होती है।
विषुव और दिन-रात की लंबाई
आमतौर पर माना जाता है कि विषुव(इक्विनॉक्स) पर दिन और रात बराबर होते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा केवल संक्रांति (Solstice) के दिन होता है। सितंबर इक्विनॉक्स के सबसे पास आने वाला पूर्णिमा चंद्रमा "हार्वेस्ट मून" कहलाता है। यह खास इसलिए होता है क्योंकि इस समय एक दिन से अगले दिन चंद्रमा के उदय का अंतर सामान्य 50 मिनट से कम हो जाता है। इसका कारण चंद्रमा की कक्षा का झुकाव है।
दिल्ली के लिए विषुव (इक्विनॉक्स) का समय
विषुव (इक्विनॉक्स) का समय पूरी दुनिया में अलग-अलग जगहों पर अक्षांश और देशांतर के आधार पर बदलता है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए इस साल का इक्विनॉक्स सोमवार, 22 सितंबर को रात 23:49 IST पर होगा। इसकी उलटी गिनती पहले ही शुरू हो चुकी है।





