Delhi AQI: अक्टूबर में दिल्ली की हवा हुई जहरीली, हरियाणा का धारूहेड़ा बना देश का सबसे प्रदूषित शहर
ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (Centre for Research on Energy and Clean Air - CREA) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में भारत की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश के कई शहरों में PM₂.₅ स्तर में खतरनाक वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 249 शहरों की निगरानी की गई, जिनमें से 212 शहरों में 80% से अधिक डेटा उपलब्ध रहा। इनमें से 243 शहरों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित दैनिक स्तर 15 µg/m³ से अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया, यह सितंबर के 203 शहरों से बड़ा उछाल है।
हालांकि, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत आने वाले 98 शहरों में से 86 शहर भारत के राष्ट्रीय मानक (NAAQS) — यानी 60 µg/m³ के भीतर रहे। इसी तरह, 151 गैर-NCAP शहरों में से 126 शहर भी इस मानक के अंदर रहे। सिर्फ 6 शहरों ने WHO के सख्त वायु गुणवत्ता मानकों का पालन किया।

देशभर में हवा की गुणवत्ता में गिरावट
अक्टूबर महीने में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर में बड़ा बदलाव देखा गया। ‘Good’ श्रेणी (0–30 µg/m³) वाले शहरों की संख्या सितंबर के 179 से घटकर 68 रह गई। ‘Satisfactory’ श्रेणी (31–60 µg/m³) में शहरों की संख्या 144 तक बढ़ी, जबकि ‘Moderate’ श्रेणी (61–90 µg/m³) में 4 से बढ़कर 27 शहर शामिल हो गए। 9 शहर ‘Poor’ (91–120 µg/m³) श्रेणी में पहुंचे और एक शहर ‘Very Poor’ (121–250 µg/m³) श्रेणी में गया। यह गिरावट विशेष रूप से इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों (Indo-Gangetic Plains) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में देखी गई।
धारूहेड़ा बना देश का सबसे प्रदूषित शहर
हरियाणा का धारूहेड़ा (Dharuhera) अक्टूबर 2025 में देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां औसत मासिक PM₂.₅ स्तर 123 µg/m³ दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय सीमा से दोगुना है। महीने के 77% दिनों में यह शहर NAAQS सीमा से ऊपर रहा।
विभिन्न AQI श्रेणियों में इसका विभाजन इस प्रकार रहा —
• 2 दिन ‘Good’
• 4 दिन ‘Satisfactory’
• 7 दिन ‘Moderate’
• 2 दिन ‘Poor’
• 9 दिन ‘Very Poor’
• 2 दिन ‘Severe’
देश के शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों में रोहतक, गाज़ियाबाद, नोएडा, बल्लभगढ़, दिल्ली, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, हापुड़ और गुरुग्राम भी शामिल रहे, सभी NCR क्षेत्र के अंदर हैं।
दिल्ली में प्रदूषण तीन गुना बढ़ा
दिल्ली छठे स्थान पर रही, जहां औसत PM₂.₅ स्तर 107 µg/m³ दर्ज हुआ, जो सितंबर के औसत 36 µg/m³ से लगभग तीन गुना अधिक है। हालांकि, पराली जलाने (Stubble Burning) से दिल्ली के प्रदूषण में 6% से कम योगदान रहा, लेकिन लगातार ऊँचे स्तर यह दर्शाते हैं कि स्थानीय स्रोतों से उत्सर्जन अभी भी प्रमुख कारण हैं। CREA ने चेतावनी दी है कि दिल्ली को सिर्फ सर्दियों के अल्पकालिक उपायों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है।
सबसे स्वच्छ हवा: शिलॉन्ग शीर्ष पर
इसके विपरीत, मेघालय का शिलॉन्ग (Shillong) देश का सबसे स्वच्छ शहर बना, जहां अक्टूबर में औसत PM₂.₅ स्तर मात्र 10 µg/m³ रहा। 10 सबसे स्वच्छ शहरों में कर्नाटक के 4, तमिलनाडु के 3, और मेघालय, सिक्किम व छत्तीसगढ़ के 1-1 शहर शामिल रहे। भारत के महानगरों में चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु NAAQS सीमा के भीतर रहे, जबकि दिल्ली अपवाद रही।
अधिकांश शहर पहले ही पार कर चुके हैं WHO की वार्षिक सीमा
CREA की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 293 में से 255 शहरों ने अक्टूबर तक ही WHO के वार्षिक PM₂.₅ मानक को पार कर लिया है। वहीं, भारत के ढीले मानकों (NAAQS) को सिर्फ 37 शहरों ने पार किया। यह अंतर दिखाता है कि भारत के वायु गुणवत्ता मानक वैश्विक स्तर से पीछे हैं। चूंकि NAAQS को 2009 में अंतिम बार संशोधित किया गया था, इसलिए अब इन मानकों को WHO के नवीनतम लक्ष्यों के अनुरूप अपडेट करने की जरूरत है ताकि जनस्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा की जा सके।
निष्कर्ष:
अक्टूबर 2025 में भारत की हवा खतरनाक रूप से प्रदूषित हुई। दिल्ली-एनसीआर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जबकि शिलॉन्ग जैसे पहाड़ी शहरों ने राहत दी। CREA की रिपोर्ट बताती है कि अब भारत को सख्त वायु गुणवत्ता मानकों और दीर्घकालिक प्रदूषण नियंत्रण नीति की तत्काल जरूरत है।
नोट: डेटा और रैंकिंग ऊर्जा एवं स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (Centre for Research on Energy and Clean Air - CREA) से ली गई है, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (CAAQMS) के अक्टूबर 2025 के आंकड़ों पर आधारित है।
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