La Nina Impact: ला-नीना लौट आया, भारत, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान में कड़ाके की सर्दी पड़ेगी

By: skymet team | Edited By: skymet team
Oct 16, 2025, 12:30 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

La Nina Impact:कड़ाके की सर्दी पड़ेगी

ला-नीना और एल-नीनो ENSO (El Niño–Southern Oscillation) के दो विपरीत चरण हैं। ये दोनों ही उत्तरी गोलार्ध के सर्दियों के मौसम में एशिया के बर्फीले और ठंडे इलाकों पर गहरा असर डालते हैं। ला-नीना के दौरान भारत के उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान, हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला और अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी जैसे इलाकों में कड़क और कड़ी सर्दी पड़ती है।

पिछले छह सालों में पांच बार बना ला-नीना

ला-नीना की स्थितियाँ एक बार फिर मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में लौट आई हैं। यह पिछले छह वर्षों (2020, 2021, 2022, 2024 और 2025) में पाँचवीं बार हो रहा है। इस बीच 2023 एल नीनो वर्ष रहा था। ला-नीना, ENSO का नकारात्मक चरण है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ठंडा हो जाता है और इसके साथ ही वैश्विक वायुमंडलीय परिप्रवाह में बदलाव आते हैं। इस बार ला-नीना के साथ-साथ निगेटिव IOD (Indian Ocean Dipole) भी सक्रिय रहेगा, जो सर्दियों को और कठोर बना सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार का ला-नीना कमजोर और अल्पकालिक(कम समय क लिए) रहने की संभावना है।

1200x630 (1).png

La Nina Impact, Image: Australian BOM

हिमालय में समय से पहले बर्फबारी

अक्टूबर की शुरुआत में ही हिमालय ने सर्दियों की सफेद चादर ओढ़ ली है। महीने के पहले सप्ताह में कश्मीर की खूबसूरत घाटी गुलमर्ग और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बर्फ की परतें जम गईं है। इसके बाद सिन्थन टॉप, रोहतांग पास और धौलाधार रेंज में भी हल्की से मध्यम बर्फबारी हुई। यह असमय बर्फबारी जहां पर्यटकों के लिए रोमांचक रही, वहीं स्थानीय लोगों के लिए ठंडी हवाओं, घने कोहरे और जमी हुई चोटियों का यह नजारा कुछ अलग ही अनुभव रहा।

पिछले मानसून के बाद अब ठंड का खतरा

मानसून के दौरान भारत के पर्वतीय राज्यों, उत्तर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भारी बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाएं हुई थीं। अब ला-नीना और बाढ़ के प्रभाव मिलकर इन इलाकों में और ठंडा मौसम ला सकते हैं। भारत के पहाड़ी राज्यों, उत्तरी मैदानों, पाकिस्तान के उत्तरी व पहाड़ी क्षेत्रों और अफगानिस्तान के मध्यम व ऊँचे हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और बर्फबारी दर्ज हो सकती है।

संभावित प्रभाव (Impacts of La Niña and IOD):

• कम बर्फबारी से पर्यटकों की संख्या घट सकती है

• नदियों में पानी की कमी से सिंचाई और खेती प्रभावित हो सकती है

• खराब मौसम रबी फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है

• ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है

• पशुधन और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ेगा

• मैदानी इलाकों में धुंध और प्रदूषण बढ़ेगा

‘चिल्लई कलां’ का मौसम और कठिन होगा

कश्मीर घाटी का सबसे ठंडा समय, जिसे ‘चिलई कलां’ कहा जाता है, इस बार काफी कठोर और जमाने वाली ठंड लेकर आ सकता है। कम बर्फबारी की वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनवरी-फरवरी में होने वाले विंटर गेम्स प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, कम वर्षा और बर्फबारी के चलते नदी बेसिनों में पानी की उपलब्धता घटेगी, जिससे जल संरक्षण की जरूरत और बढ़ जाएगी।

author image

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है