दिल्ली में पहली बार ‘क्लाउड सीडिंग’ ट्रायल आज, कृत्रिम बारिश से प्रदूषण पर लग सकती है लगाम

By: skymet team | Edited By: skymet team
Oct 28, 2025, 11:45 AM
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दिल्ली में पहली बार कृत्रिम बारिश, प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली में आज पहली बार क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) का ट्रायल किया जा रहा है यानी वैज्ञानिक तरीके से कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश। इस प्रयोग का उद्देश्य शहर की खराब वायु गुणवत्ता (Air Quality) को अस्थायी रूप से सुधारना और प्रदूषण से राहत दिलाना है। यह ऑपरेशन एक पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसकी तैयारी कई महीनों से चल रही थी। इसका मकसद यह जांचना है कि कृत्रिम बारिश से क्या स्मॉग और प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है।

कानपुर से उड़ान भरेगा विशेष विमान

क्लाउड सीडिंग का यह पूरा प्रयोग मौसम की अनुकूलता (favourable weather conditions) पर निर्भर करेगा। फिलहाल ट्रायल के लिए तैयार विमान कानपुर में तैनात है, और जैसे ही वहाँ मौसम साफ़ होगा व दृश्यता (visibility) 5000 मीटर से अधिक होगी। विमान उड़ान भरेगा, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नमी वाले बादलों (moisture-laden clouds) तक पहुँचेगा, और वहाँ सीडिंग मटेरियल (seeding material) फैलाएगा। इसके बाद विमान प्रक्रिया पूरी कर वापस लौट आएगा। यह ऑपरेशन दोपहर 12:30 से 1:00 बजे के बीच किया जा सकता है, जो वायुमंडलीय स्थिरता और दृश्यता पर निर्भर करेगा।

IIT कानपुर ने तैयार की खास रासायनिक फॉर्मूलेशन

दिल्ली में इस प्रयोग के लिए जो मिश्रण (formulation) इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) ने विकसित किया है। इसमें सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide) नैनोपार्टिकल्स, आयोडाइज्ड नमक और रॉक सॉल्ट (पथरीला नमक) शामिल हैं। जब ये कण उपयुक्त बादलों में छोड़े जाते हैं, तो ये नमी को आकर्षित करने वाले केंद्र (nuclei) का काम करते हैं। इनसे छोटे-छोटे जलकण आपस में मिलकर बड़े पानी की बूंदों में बदल जाते हैं, जो अंततः बारिश के रूप में गिरने लगते हैं।

प्रदूषण के बीच उम्मीद की किरण

यह ट्रायल ऐसे समय हो रहा है जब दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी में बनी हुई है। आज सुबह दिल्ली का औसत AQI लगभग 306 दर्ज किया गया, जबकि सिरी फोर्ट, बवाना और आनंद विहार जैसे कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 320 से ऊपर रहा। दीवाली के बाद का स्मॉग, स्थिर हवाएं और सर्दी की इनवर्ज़न लेयर ने प्रदूषकों को जमीन के पास फंसा दिया है, जिसके चलते सरकार ने यह मौसम संशोधन तकनीक (weather modification technique) अपनाने का फैसला किया है।

सफल रहा तो बनेगा ऐतिहासिक कदम

अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह शहरी मौसम विज्ञान (Urban Meteorology) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी। यह दिखाएगा कि कैसे लक्षित वायुमंडलीय हस्तक्षेप (targeted atmospheric intervention) से बड़े शहरों की वायु गुणवत्ता प्रबंधन (air quality management) में मदद मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि क्लाउड सीडिंग की सफलता पूरी तरह बादलों में नमी और हवा की दिशा पर निर्भर करती है, इसलिए हर प्रयास में सफलता की गारंटी नहीं दी जा सकती।

स्वच्छ हवा की दिशा में वैज्ञानिक पहल

भले ही यह प्रयोग अभी परीक्षण स्तर (experimental stage) पर है,लेकिन यह दिल्ली की पर्यावरण और जनस्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक आधुनिक और वैज्ञानिक कदम है। यह पहल दर्शाती है कि भारत अब मौसम विज्ञान (Meteorology) को प्रदूषण नियंत्रण और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बना रहा है,जहाँ मौसम नवाचार (weather innovation) और स्वच्छ हवा की जरूरत को साथ जोड़ा जा रहा है।

आज दिल्ली का यह क्लाउड सीडिंग ट्रायल कृत्रिम बारिश के जरिये प्रदूषण घटाने का पहला वैज्ञानिक प्रयास है। अगर यह सफल हुआ, तो यह दिल्ली और अन्य महानगरों के लिए स्वच्छ हवा की दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि साबित हो सकता है।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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