पहाड़ों पर फिर छाए काले बादल, उत्तराखंड और हिमाचल में झमाझम का अलर्ट, जानें अगले सप्ताह कैसा रहेगा मौसम
जुलाई के बचे हुए दिनों में उत्तर भारत की पहाड़ियों पर मानसून की जबरदस्त गतिविधि देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश अधिक संवेदनशील रहेंगे और मौसम की गंभीरता भी इन्हीं राज्यों में अधिक रहने की संभावना है। 23 और 24 जुलाई को भारी बारिश के दो दिन बाद 25 जुलाई को मौसम थोड़ी राहत देगा, लेकिन फिर इसके बाद महीने के अंत तक बारिश का दौर दोबारा शुरू होगा। इन राज्यों के निचले और मध्य पर्वतीय इलाकों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों की तुलना में अधिक जोखिम रहेगा।
मानसून ट्रफ का उत्तर की ओर खिसकना और पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका
मानसून ट्रफ (अक्षीय रेखा) का पश्चिमी सिरा सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर 3,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर खिसक गया है। इस समय एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवा की ट्रफ के रूप में पहाड़ों से गुजर रहा है, जिससे अगले तीन दिनों तक ट्रफ इसी स्थिति में बना रह सकता है। 23 और 24 जुलाई को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बिखरी हुई तेज बारिश की संभावना है। 25 जुलाई को हल्की राहत के बाद, फिर से मौसम की स्थिति बदलेगी और एक नई प्रणाली के प्रभाव में बारिश दोबारा बढ़ेगी।
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम और पहाड़ों पर डबल अटैक
24 जुलाई को बंगाल की उत्तरी खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) बनने की संभावना है, जो 25-26 जुलाई को ताकत पकड़कर देश के भीतर प्रवेश करेगा। इससे मजबूत पूरब की ओर बहने वाली मानसूनी हवाएँ पूरे गंगा के मैदानी क्षेत्रों से गुजरेंगी। इसके साथ ही, उत्तराखंड और हिमाचल की तराई के क्षेत्र, एक ओर से इन पूरब की हवाओं, और दूसरी ओर से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के डबल अटैक की चपेट में आ जाएंगे।
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27 से 31 जुलाई: सबसे ज्यादा जोखिम का समय
इन दोनों प्रणालियों के परस्पर प्रभाव से, 27 जुलाई से 31 जुलाई के बीच पहाड़ी इलाकों में मौसम और अधिक बिगड़ सकता है। विशेष रूप से निचले और मध्य पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, बादल फटना, अचानक बाढ़ जैसे घटनाएं सामने आ सकती हैं। इस समय के दौरान, मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा भी धीरे-धीरे तराई की ओर सरकने लगेगा, जिससे पूरे इलाके में खराब मौसम की स्थिति और अधिक समय तक बनी रह सकती है।
अलर्ट और निगरानी जरूरी
हालांकि वर्तमान मौसम मॉडल केवल चार दिन तक सही पूर्वानुमान दे पाते हैं, इसलिए इसके आगे की स्थिति पर अनुमान लगाना थोड़ा मुश्किल है। मौसम के इस बदलाव को लेकर निगरानी लगातार जारी है और जैसे ही नई जानकारी उपलब्ध होगी, वैसे ही पूर्वानुमान को अपडेट किया जाएगा।





