टाइफून 'WIPHA' के अवशेष बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़े, नया सिस्टम देगा जोरदार बारिश

By: Skymet team | Edited By:
Jul 23, 2025, 12:50 PM
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बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़े टाइफून विफा के अवशेष

पश्चिमी प्रशांत महासागर में उठे शक्तिशाली टाइफून 'WHIFA' ने बीते रविवार को हांगकांग और चीन के पूर्वी तट को जबरदस्त रूप से प्रभावित किया। पहले से जारी चेतावनी के अनुसार यह गंभीर चक्रवात उत्तरी वियतनाम में भारी तबाही मचाने के बाद कमजोर पड़ा और पश्चिम की ओर बढ़ गया है।

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म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर बना निम्न दबाव क्षेत्र

यह सिस्टम लाओस पार करके थाईलैंड और म्यांमार की सीमा पर एक "अच्छी तरह से चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र" के रूप में स्थित हो गया है। अब यह अवशेष पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए कल (24 जुलाई) उत्तरी बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करेगा। इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो धीरे-धीरे और मजबूत होकर तट पार करेगा।

25 जुलाई को तटीय ओडिशा और गंगीय बंगाल पर असर

निम्न दबाव क्षेत्र के 25 जुलाई को एक डिप्रेशन (अवदाब) में बदलने की संभावना है, जो उत्तर ओडिशा और गंगा-पश्चिम बंगाल के समुद्री हिस्से पर अधिक केंद्रित रहेगा। सिस्टम का मुख्य केंद्र अभी समुद्र पर रहेगा, लेकिन इससे काफी आगे अंदरूनी हिस्सों में मौसम गतिविधियाँ 24 जुलाई से ही शुरू हो जाएंगी। 25 जुलाई को इनकी तीव्रता व क्षेत्रफल में बढ़ेगा।

26 जुलाई से मानसून ट्रफ से टकराव, प्रभाव में होगा विस्तार

26 जुलाई से यह सिस्टम मानसून ट्रफ (मानसून की अक्षीय रेखा) के संपर्क में आने लगेगा, जिससे इसके प्रभाव का दायरा और गंभीरता दोनों बढ़ेंगे। इससे पूर्व और उत्तर भारत में भारी बारिश देखने को मिल सकती है।

किन राज्यों पर पड़ेगा सबसे ज़्यादा असर?

यह तेज वर्षा प्रणाली ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों को प्रभावित करेगी। हालांकि इसका असर एक ही समय पर नहीं बल्कि क्रमिक रूप से (staggered manner) देखने को मिलेगा। यानी, बारिश एक साथ सभी राज्यों में नहीं होगी, एक-एक करके राज्यों में असर दिखेगा।

आगे की स्थिति पर संशय, पर नजर बनी रहेगी

हालांकि, मौजूदा मौसम मॉडल चार दिन से अधिक की भविष्यवाणी में अनिश्चित हो जाते हैं, इसलिए अभी यह अनुमान लगाना कठिन है कि यह सिस्टम कितना गंभीर साबित होगा। पर इस सिस्टम की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है, ताकि समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।

ब्रेक-इन-मॉनसून के संकेत?

शुरुआती लेकिन पक्के नहीं माने जा रहे संकेतों के अनुसार, जैसे-जैसे यह सिस्टम भारत के मध्य भागों से गुजरेगा, मानसून ट्रफ का पूर्वी सिरा सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसकने लगेगा। अगर यह प्रवृत्ति बनी रही तो संभव है कि मानसून की पूरी अक्षीय रेखा ही उत्तर की ओर खिसक जाए। इस स्थिति को सीजन का पहला "ब्रेक-इन-मॉनसून" माना जा सकता है। यानी जब मानसून कुछ दिनों के लिए कमजोर हो जाता है और बारिश हिमालय की तराई तक सिमट जाती है। जैसे ही सिस्टम ज़मीन पर ट्रैवर्स करना शुरू करेगा, पूर्वानुमान को अपडेट किया जाएगा।

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Skymet team

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