देश में मानसून ने किया उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन, लेकिन कुछ इलाकों में बारिश की कमी बनी परेशानी... जानें क्या है कारण?

By: Skymet team | Edited By:
Jul 22, 2025, 4:00 PM
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देशभर में मानसून का प्रदर्शन, फोटो: PTI

इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत समय से पहले हो गई थी और पूर्वी व पश्चिमी दोनों दिशाओं से देश के अधिकांश हिस्सों को जल्दी कवर कर लिया गया था। लेकिन 26 मई से 15 जून के बीच मानसून की रफ्तार थम गई और इसकी प्रगति पूरी तरह से रुक गई। इसके बाद फिर से मानसून ने तेज़ी पकड़ी और तय समय से एक सप्ताह पहले ही पूरे देश को कवर कर लिया।

देश में जून-जुलाई में हुई मानसून की बारिश

देश में जून-जुलाई में हुई मानसून की बारिश

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जून और जुलाई की पहली छमाही को सबसे अच्छा कहा जा सकता है, लेकिन इसमें भी कुछ समस्याएं रहीं। देश के कुछ हिस्सों में बारिश का वितरण असंतुलित रहा, यानी कहीं बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम। इस बार बारिश का फैलाव समान नहीं है, बल्कि एक जैसे क्षेत्रों में ज्यादा और बाकी जगहों पर कम है।

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2013 के बाद पहली बार दोनों महीनों में अच्छी बारिश

मानसून के इतिहास में बहुत कम बार ऐसा हुआ है कि जून और जुलाई दोनों महीने अच्छा प्रदर्शन करें। आखिरी बार ऐसा 2013 में हुआ था जब ENSO-न्यूट्रल साल था और पूरे सीजन में बारिश सामान्य से ऊपर रही थी (106% of LPA)। हालांकि, उस साल सितंबर में बारिश की 12% की कमी दर्ज की गई थी।

मानसून 2025: अब तक सामान्य से ऊपर बारिश

जून 2025 में 9% अधिक बारिश हुई, जिससे मानसून की शुरुआत काफी मजबूत रही। जुलाई की पहली दस तारीखों तक यह बढ़कर 115% of LPA तक पहुंच गई। हालांकि, बाद में दक्षिण भारत और कुछ क्षेत्रों में गतिविधि धीमी हो गई, लेकिन 1 जून से 21 जुलाई तक कुल मिलाकर 106% of LPA बारिश हो चुकी है। जून और जुलाई, दोनों महीने ने क्रमशः 109% और 106% बारिश दर्ज की है।

कुछ हिस्सों में भारी बारिश की कमी, चिंता की वजह

देश में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां गंभीर वर्षा की कमी है। अरुणाचल प्रदेश और असम मेघालय में बारिश की घटत 45% और 47% है, इतनी भारी कमी को पूरा करना मुश्किल होगा। वहीं, बिहार में भी शुरुआत में बारिश की 55% की भारी कमी थी, जो हाल बादलों के बरसने से घटकर 42% रह गई है। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश सामान्य से 20% कम है।

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मराठवाड़ा में सूखे का संकट

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र पहले से ही सूखा प्रभावित माना जाता है। इस साल भी यहां बहुत कम बारिश हुई है और पूरे मानसून सीजन में अब तक लगातार 45% की कमी बनी हुई है। आज की तारीख में यह क्षेत्र 44% कम वर्षा के साथ सूखे की ओर बढ़ रहा है।

दक्षिण भारत के हालात भी कुछ बेहतर नहीं

दक्षिणी भारत की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नहीं है। रायलसीमा में जुलाई के मध्य तक 46% की भारी कमी दर्ज की गई थी। हाल की बारिश से स्थिति थोड़ी सुधरी है लेकिन अब भी 22% की कमी बनी हुई है। तेलंगाना भी अब घटती वर्षा की श्रेणी में आ गया है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में बारिश की पहले जो बढ़त थी, वह अब घटकर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है।

खेती के लिए अहम हिस्सों में बारिश की कमी, चिंता बरकरार

हालांकि देश के कई हिस्सों में मानसून ने अच्छा प्रदर्शन किया है, खासकर उन इलाकों में जहां इसकी सबसे जरूरत थी, लेकिन पूर्वी और मध्य भारत के वर्षा-आश्रित इलाकों में बारिश की कमी किसानों के लिए चिंता का कारण है। जुलाई के बाकी दिनों में दक्षिण और मध्य भारत में बारिश की कोई बड़ी वापसी की संभावना नहीं है।

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Skymet team

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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