दिल्ली में जुलाई की रिकॉर्ड बारिश, मासिक औसत पार, आगे भी जारी रहेगा बारिश का दौर

By: skymet team | Edited By: skymet team
Jul 30, 2025, 1:35 PM
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दिल्ली के कुछ हिस्सों में कल इस महीने की सबसे तेज बारिश दर्ज की गई। खासकर दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। सफदरजंग वेधशाला ने 68 मिमी, लोधी रोड कार्यालय ने 72.4 मिमी और रिज क्षेत्र में 130 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो जुलाई की पहली तीन अंकों वाली बारिश थी। हालांकि बारिश बहुत ही कम समय के लिए हुई थी, लेकिन उसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो गया।

सिस्टम की वजह से भारी बारिश

इस समय कम दबाव का क्षेत्र पूर्वोत्तर राजस्थान और उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश पर बना हुआ है। इसके साथ ही जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण काफी मजबूत है, जो मध्य क्षोभमंडलीय स्तर तक फैला है। यह सिस्टम मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भारी वर्षा का कारण बना। इसी प्रणाली का असर उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली तक पहुंच गया। यह सिस्टम अगले दो दिन और सक्रिय रह सकता है, इसके बाद इसकी ताकत कमजोर हो जाएगी।

मानसून ट्रफ दिल्ली के पास, बारिश के लिए अनुकूल परिस्थिति

मानसून ट्रफ इस समय दिल्ली के ऊपर से गुजर रहा है और ऊंचाई के साथ थोड़ा दक्षिण की ओर झुका हुआ है। यह स्थिति दिल्ली और एनसीआर में तेज बारिश और गरज-चमक के लिए बहुत अनुकूल है। यह कम दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम की ओर बढ़ेगा और 1 अगस्त तक राजस्थान के उत्तरी भागों में जाकर कमजोर पड़ जाएगा। इसके बाद यह प्रणाली उत्तर की ओर मुड़ेगी और 2 अगस्त को उत्तराखंड व पश्चिम यूपी के पहाड़ी इलाकों में जाकर समाप्त हो जाएगी।

अगस्त की शुरुआत बारिश के साथ, दिल्ली के लिए राहत की खबर

1 अगस्त तक मानसून ट्रफ दिल्ली के आसपास ही बना रहेगा, और उसके बाद यह राजधानी से उत्तर की ओर खिसक जाएगा। हालांकि, इसके अवशेष प्रभाव (remnants) की वजह से पश्चिम उत्तर प्रदेश और निचले उत्तराखंड में 3–4 दिन और अच्छी बारिश जारी रह सकती है। दिल्ली अब एक्टिव मौसम क्षेत्रों के किनारे (periphery) पर रहेगी, जिससे अगले सप्ताह के मध्य तक रुक-रुक कर बारिश और गरज-चमक देखने को मिलती रहेगी। तापमान 30°C के आसपास बना रहेगा, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी। इस तरह अगस्त की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर में भीगी-भीगी रहेगी।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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