Monsoon 2026 Update: प्री-मानसून बारिश बढ़ी, क्या समय पर पहुंचेगा दक्षिण-पश्चिम मानसून?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Apr 22, 2026, 7:15 PM
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मानसून 2026 अपडेट, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • अप्रैल के अंत से प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज होंगी
  • 26 अप्रैल से उत्तर भारत में ट्रफ के कारण आँधी-बारिश
  • पूर्वोत्तर में 26 अप्रैल से 2 मई तक भारी बारिश
  • मानसून समय पर आने की संभावना

अप्रैल 2026 के आखिरी सप्ताह से देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। यह बारिश का दौर मई के पहले सप्ताह तक जारी रह सकता है। हालांकि, गुजरात और कोंकण क्षेत्र को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में यह गतिविधियाँ अलग-अलग समय पर (स्टैगर्ड) देखने को मिलेंगी। प्री-मानसून पीक रेनफॉल (PMPR) का दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से गहरा संबंध माना जाता है। कोई तय नियम नहीं है, लेकिन पुराने रिकॉर्ड के आधार पर यह एक अहम संकेत होता है। आमतौर पर PMPR के करीब 40 दिन बाद मानसून भारत में प्रवेश करता है।

पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ से उत्तर भारत में बढ़ेगी हलचल

अप्रैल के आखिरी सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ लगातार सक्रिय रहेंगे, जिससे उत्तरी पहाड़ी इलाकों में मौसम में बदलाव बना रहेगा। 26 अप्रैल से पंजाब और उत्तर राजस्थान से लेकर बिहार और उत्तर-पश्चिम बंगाल तक एक पूर्व-पश्चिम ट्रफ बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में प्री-मानसून गतिविधियाँ जैसे आँधी, बारिश और गरज-चमक जारी रहेंगी।

पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और आँधी-तूफान का दौर

पूर्वोत्तर भारत में कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय रहेंगी। असम घाटी में ट्रफ, मध्य बांग्लादेश पर चक्रवाती परिसंचरण और हेड बे (बंगाल की खाड़ी) पर एंटी-साइक्लोन के कारण 26 अप्रैल से 2 मई के बीच पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापक बारिश और गरज-चमक देखने को मिलेगी। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। यह गतिविधियाँ ओडिशा के तटीय इलाकों तक भी पहुंचेंगी।

दक्षिण भारत में भी गरज-चमक और बारिश की संभावना

दक्षिण भारत में मौसमी उत्तर-दक्षिण ट्रफ के कारण 27 अप्रैल से 2 मई के बीच मौसम सक्रिय रहेगा। तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में छिटपुट आँधी और बारिश हो सकती है। वहीं कर्नाटक, रायलसीमा, केरल और तमिलनाडु के आंतरिक भागों में ज्यादा प्रभावी बारिश और गरज-चमक देखने को मिलेगी।

समय पर आ सकता है मानसून, मिलेगी बड़ी राहत

PMPR और मानसून के बीच संबंध को देखते हुए अनुमान है कि इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून समय पर आ सकता है। लगभग 40 दिन के अंतराल के आधार पर मानसून की एंट्री बिना ज्यादा देरी के होने की संभावना है। मानसून का समय पर आना न केवल खेतों के लिए बल्कि नदियों और पूरे देश के लिए राहत लेकर आता है। यह सूखी धरती को जीवन देता है और देश में नई ऊर्जा का संचार करता है।

PMPR का मतलब है प्री-मानसून पीक रेनफॉल, यानी मानसून आने से पहले होने वाली सबसे अधिक और सक्रिय बारिश की अवधि। यह आमतौर पर अप्रैल के अंत से मई के बीच देखने को मिलती है, जब आँधी, गरज-चमक और तेज बारिश की घटनाएं बढ़ जाती हैं।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इसकी शुरुआत होगी और मई के पहले सप्ताह तक जारी रहेगी।

उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में आंधी, बारिश और गरज-चमक ज्यादा देखने को मिलेगी।

PMPR के आधार पर संकेत हैं कि मानसून समय पर आ सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है