मानसून ने छोड़ा कई राज्यों का साथ, बिहार-मराठवाड़ा और रायलसीमा में सूखे जैसे हालात, खेती पर मंडराया खतरा
मानसून सीजन का एक तिहाई हिस्सा बीत चुका है और अब तक औसत से 15% अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। हालांकि, देश के लगभग 14% हिस्से में बारिश की गंभीर कमी बनी हुई है। मैदानी इलाकों में बारिश की सबसे ज्यादा कमी बिहार (-50%), मराठवाड़ा (-39%), और रायलसीमा (-38%) में है। पर्वतीय क्षेत्रों में अरुणाचल प्रदेश (-39%), असम और मेघालय (-40%), तथा सिक्किम और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल (-37%) में भी भारी बारिश की कमी है। वहीं, लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्र में भी -44% बारिश की कमी दर्ज की गई है। ये सभी आंकड़े चिंताजनक हैं और कृषि क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी हैं।
बंगाल की खाड़ी से उठे सिस्टम से असमान बारिश का वितरण
अब तक मानसून के ज्यादातर सिस्टम बंगाल की खाड़ी से उठकर पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की ओर बढ़े हैं। इन ट्रैकों के दोनों ओर के इलाकों में कमजोर बारिश देखने को मिली है। दक्षिण भारत (South Peninsula) में पिछले दो हफ्तों से बारिश काफी कम हुई है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मराठवाड़ा और तेलंगाना में भी मानसून कमजोर बना हुआ है। जो पहले कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश से जमा हुआ मौसमीय लाभ था, अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। आने वाले समय में इन राज्यों में 20% से अधिक वर्षा की कमी हो सकती है।
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इन चार राज्यों में अगले 5-6 दिन होगी बारिश
आगामी 5-6 दिनों तक भारी बारिश झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक सीमित रहेगी। वहीं, बिहार, मराठवाड़ा और रायलसीमा में इस दौरान बारिश की कमी और बढ़ने की आशंका है। हालांकि, 15 से 20 जुलाई के बीच मानसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने और एक नए कम दबाव क्षेत्र के बनने के कारण बिहार में मध्यम बारिश संभव है। लेकिन मराठवाड़ा और रायलसीमा के लिए 8-10 दिनों तक कोई विशेष मौसम परिवर्तन की संभावना नहीं है। इसलिए इन क्षेत्रों में बारिश की कमी और गहराने की संभावना है।
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हिमालयी क्षेत्र में बारिश नहीं पाएगी सूखे की भरपाई
सिक्किम, सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में 15 से 17 जुलाई के बीच अच्छी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें होने की संभावना है। हालांकि यह बारिश अभी तक की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाएगी और इन क्षेत्रों में कृषि संकट की स्थिति बनी रह सकती है।





