उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन कल, तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत में भारी बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत 15 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन एक साथ हो सकता है।
- तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी प्रायद्वीप के अन्य हिस्सों में बारिश बढ़ने के आसार हैं।
- तमिलनाडु में इस मौसम सामान्य या सामान्य से कुछ अधिक बारिश होने का अनुमान है।
- पूर्वानुमान वैधता: 14–20 अक्टूबर 2026 के दौरान दक्षिण भारत में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।
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दक्षिण भारत में लंबे समय से प्रतीक्षित उत्तर-पूर्वी मानसून की दस्तक अब करीब है। इसके जल्द शुरू होने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन से पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से वापसी जरूरी होती है। हालांकि, दोनों घटनाएं एक ही समय पर भी हो सकती हैं। मौजूदा मौसमी परिस्थितियां इसी तरह के घटनाक्रम के अनुकूल दिखाई दे रही हैं। संभावना है कि 15 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन हो जाए और दक्षिण-पश्चिम मानसून भी देश से पूरी तरह विदा हो जाए। ऐसा संयोग पिछले लगातार दो वर्षों, 2024 और 2025 में भी देखने को मिला था।
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सैटेलाइट इमेज, Himawari
कोमोरिन क्षेत्र में चक्रवाती परिसंचरण से बढ़ेगी बारिश
उत्तर-पूर्वी मानसून को सक्रिय करने वाली प्रमुख मौसम प्रणाली कोमोरिन क्षेत्र के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण है। इससे जुड़ा एक उत्तर-दक्षिण ट्रफ मन्नार की खाड़ी से होते हुए पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक फैला है। यह ट्रफ तमिलनाडु तट के करीब बना हुआ है। उत्तर-पूर्वी मानसून की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा के लिए तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अच्छी बारिश होना एक जरूरी शर्त है। मौजूदा परिस्थितियों में 14 से 20 अक्टूबर के बीच पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप में हल्की से मध्यम और कई स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है। इससे दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
दक्षिण भारत के इन राज्यों में होती है उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश
दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर करीब 40 दिनों में पूरे देश को कवर करता है। इसके विपरीत, उत्तर-पूर्वी मानसून के लिए पूरे देश में आगे बढ़ने या अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचने की कोई ऐसी निर्धारित समयसीमा नहीं है। इसकी शुरुआत एक खास तारीख पर होती है और इसके बाद बारिश का सिलसिला जारी रहता है। उत्तर-पूर्वी मानसून मुख्य रूप से तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक में बारिश लाता है। इसके अलावा कर्नाटक के अन्य हिस्सों, तेलंगाना, गोवा और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी इस मौसम में बारिश होती है। हालांकि, मौसम के आधिकारिक मौसमी आंकड़ों के लिए दक्षिणी प्रायद्वीप के केवल पांच मौसम उपखंडों की बारिश को शामिल किया जाता है।
अल नीनो के बावजूद सामान्य बारिश की उम्मीद
उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु में बारिश का सबसे प्रमुख मौसम है। यह राज्य के लिए जीवनरेखा की तरह है, खासकर इस साल जब दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश में काफी कमी रही है। इस बार उत्तर-पूर्वी मानसून की गतिविधियां मजबूत अल नीनो परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ेंगी। अल नीनो का भारतीय मानसून पर प्रभाव चर्चा का विषय रहता है, लेकिन इस मौसम प्रणाली के कारण तमिलनाडु में बारिश पर कोई प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका नहीं जताई गई है। पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य में मौसमी बारिश सामान्य या सामान्य से कुछ अधिक रह सकती है। हालांकि, सामान्य बारिश के बावजूद राज्य के कुछ इलाकों में बहुत अधिक बारिश और जलभराव की स्थिति बन सकती है। इसका उदाहरण 2015 का अल नीनो वर्ष है, जब 1 दिसंबर को चेन्नई में भीषण बारिश से शहर का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था और बाद में इसे आपदा क्षेत्र घोषित किया गया था।
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