आधा सफर तय कर चुका दक्षिण-पश्चिम मानसून, देशभर में बरसी सामान्य से अधिक बारिश

By: Skymet team | Edited By:
Aug 1, 2025, 4:00 PM
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भारत में मानसून सीजन के पहले आधे हिस्से (जून-जुलाई) में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। जून में 109% और जुलाई में 105% लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) बारिश दर्ज हुई। कुल मिलाकर, सीजन के आधे हिस्से में 6% अधिशेष बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। हालांकि, देश के चारों भौगोलिक क्षेत्रों में बारिश का प्रदर्शन अलग-अलग रहा और वितरण असमान बना रहा। मध्य भारत ने 23% और उत्तर-पश्चिम भारत ने 21% अधिक वर्षा दर्ज की, जिसमें राजस्थान और मध्य प्रदेश का योगदान सबसे ज्यादा रहा।

पूरब-पूर्वोत्तर भारत में बारिश की भारी कमी

पूरब और पूर्वोत्तर भारत में 22% की कमी के साथ बारिश की स्थिति खराब रही। बिहार में 39% की भारी कमी दर्ज हुई, जबकि अरुणाचल प्रदेश और असम में 40% से अधिक की कमी देखी गई। ‘बादलों का घर’ कहे जाने वाले मेघालय में तो 56% की कमी के साथ सूखे जैसी स्थिति बनी रही। दक्षिण प्रायद्वीप में जून में 3% की कमी थी और जुलाई में भी 2% की मामूली कमी बनी रही।

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12 साल बाद जून-जुलाई में साथ-साथ अधिशेष बारिश

अक्सर मानसून का पहला आधा हिस्सा जटिल और उतार-चढ़ाव भरा होता है। जून और जुलाई का एकसाथ अधिशेष रहना बेहद दुर्लभ है, क्योंकि सामान्यत: एक माह की बारिश दूसरे की कीमत पर बढ़ती है। पिछली बार 2013 में दोनों महीने अधिशेष रहे थे। जून में 34% और जुलाई में 107% LPA बारिश दर्ज हुई थी। 2025 में भी जून (109%) और जुलाई (105%) दोनों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई और आधे सीजन का औसत 106% LPA रहा।

अगस्त की शुरुआत कमजोर, दूसरे हिस्से में सुधार की उम्मीद

अगस्त मानसून का दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना है, जिसकी औसत वर्षा 254.9 मिमी होती है। अगस्त और सितंबर मिलकर सीजन की लगभग 48% बारिश देते हैं। इस बार अगस्त की शुरुआत ‘ब्रेक-इन-मॉनसून’ के कारण कमजोर रहने की संभावना है। हालांकि यह पूरी तरह का ‘ब्रेक’ नहीं होगा, लेकिन देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश कम हो जाएगी। ब्रेक खत्म होने के लिए बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनना जरूरी होगा। अगस्त की शुरुआत सुस्त हो सकती है और सुधार महीने के दूसरे हिस्से में होने की उम्मीद है।

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Skymet team

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