आज केरल में दस्तक दे सकता है दक्षिण-पश्चिम मानसून, आगे बढ़ने की रफ्तार रह सकती है धीमी
मुख्य मौसम बिंदु
- दक्षिण-पश्चिम मानसून के आज केरल पहुंचने की संभावना है।
- पिछले दो दिनों से केरल में व्यापक बारिश दर्ज की गई है।
- मानसून के लिए जरूरी पश्चिमी हवाएं और अन्य परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।
- 1 से 3 जून के बीच देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से 29% कम रही है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के आज मुख्य भूमि केरल में प्रवेश करने की संभावना है। पिछले दो दिनों से केरल के तटीय इलाकों और आंतरिक भागों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। हालांकि मानसून की शुरुआत बहुत जोरदार नहीं होगी, लेकिन इसके आगमन के लिए जरूरी मौसमीय परिस्थितियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं। इसी वजह से आज मानसून केरल पहुंचने की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि इसके बाद दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में मानसून की प्रगति कुछ दिनों तक धीमी और सुस्त रह सकती है।
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मानसून के आगे बढ़ने की सामान्य गति क्या होती है?
आमतौर पर केरल में मानसून के आगमन के लगभग पांच दिनों के भीतर यह पूरे केरल, तमिलनाडु और तटीय कर्नाटक को कवर कर लेता है तथा पश्चिमी तट पर गोवा तक पहुंच जाता है। इस दौरान मानसूनी हवाएं कर्नाटक के अधिकांश हिस्सों, आंध्र प्रदेश के लगभग आधे क्षेत्र और पूरे पूर्वोत्तर भारत में फैल जाती हैं। यदि मौसमीय परिस्थितियाँ अनुकूल बनी रहती हैं तो मानसून इसी सामान्य गति से आगे बढ़ सकता है, लेकिन इस बार शुरुआती चरण में इसकी रफ्तार कुछ धीमी रहने की संभावना है।
मानसून घोषित करने के लिए कौन-कौन सी शर्तें जरूरी हैं?
मानसून के आगमन की घोषणा से पहले कुछ जरूरी मौसमीय मानकों का पूरा होना आवश्यक होता है। इनमें भरपूर वर्षा, बादलों का फैलाव और मौसमी पश्चिमी हवाओं की उपस्थिति शामिल है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मानसूनी पश्चिमी हवाओं की होती है। इन हवाओं की गति पर्याप्त होनी चाहिए और अरब सागर तथा भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के एक निर्धारित क्षेत्र में इनकी गहराई भी होनी चाहिए।
मानसून के आगमन का सबसे साफ संकेत केरल, लक्षद्वीप और तटीय कर्नाटक में होने वाली बारिश होती है, लेकिन केवल बारिश के आधार पर मानसून की घोषणा नहीं की जाती। कई बार प्री-मानसून बारिश भी मानसून जैसी प्रतीत होती है। इसलिए मौसम वैज्ञानिक पश्चिमी हवाओं की स्थिति को अधिक महत्व देते हैं। इन हवाओं का समुद्र के ऊपर मजबूत होना, दक्षिणी गोलार्ध से आने वाले क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का समर्थन मिलना और समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई तक इनका प्रभावी बने रहना जरूरी माना जाता है।
पिछले वर्षों की तुलना और शुरुआती बारिश की स्थिति
पिछले दो सालों, यानी 2024 और 2025 में मानसून अपने निर्धारित समय 1 जून से थोड़ा पहले केरल पहुँच गया था। सामान्य तौर पर मानसून के आगमन की तारीख में लगभग एक सप्ताह का अंतर संभव माना जाता है। इसलिए अगर इस साल मानसून 4 जून को केरल पहुंचता है तो इसे भी समय पर पहुंचा हुआ मानसून ही माना जाएगा।
हालांकि मानसून की आधिकारिक वर्षा गणना हर साल 1 जून से ही शुरू हो जाती है, चाहे मानसून की वास्तविक एंट्री किसी भी दिन हो। इस वर्ष 1 जून से 3 जून 2026 के बीच देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से 29 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। अब मौसम वैज्ञानिकों की नजर इस बात पर है कि केरल में मानसून के प्रवेश के बाद आने वाले दिनों में इसकी प्रगति कितनी तेजी से होती है और वर्षा की कमी किस हद तक पूरी हो पाती है।
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