Uttarakhand Cloudburst: उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, लगातार हो रही भारी बारिश से रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा
उत्तरकाशी में मंगलवार, 5 अगस्त की सुबह बादल फटने से अचानक भीषण बाढ़ आ गई। तेज बहाव के साथ पानी आबादी वाले इलाकों में घुस गया, जिससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और सड़कें बह गईं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन लगातार बारिश और कठिन भू-भाग के कारण प्रशासन को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
जारी की गई थी भारी बारिश की चेतावनी
आज सुबह स्काईमेट ने उत्तराखंड के कई उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, देहरादून और पिथौरागढ़ के लिए 12–18 घंटों तक मध्यम से भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी थी। बादल फटने की घटना और भारी बारिश ने उस चेतावनी को सच्चाई में बदल दिया है।
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पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड पर बारिश का दबाव
पिछले 24 घंटों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। नजीबाबाद में 223 मिमी, मुरादाबाद में लगातार दूसरे दिन 100 मिमी से अधिक बारिश हुई। बरेली, खीरी और शाहजहांपुर में 68–150 मिमी बारिश दर्ज हुई, जिससे निचली नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है।
मौसम की नाज़ुक स्थिति और अगले 24 घंटे
कम दबाव क्षेत्र का अवशेष, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में कमजोर परिसंचरण के रूप में बना हुआ है। ‘ब्रेक मानसून’ की स्थिति में मानसून ट्रफ तराई क्षेत्रों में खिसक गया है और पश्चिमी विक्षोभ के आने से यह और सक्रिय हो गया है। अगले 24 घंटों में कई जगहों पर तेज़ बारिश की संभावना है।
संवेदनशील इलाके और खतरे की संभावना
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर और यूपी के बरेली, पीलीभीत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, रामपुर, मेरठ और बदायूं सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं।
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बचाव कार्य और सतर्कता की जरूरत
प्रशासन हाई अलर्ट पर है, लेकिन खराब मौसम के कारण सूर्यास्त के बाद हवाई राहत कार्य रोकने पड़ सकते हैं। लगातार बारिश और नए भूस्खलनों का खतरा हालात को रात भर और बिगाड़ सकता है। प्रभावित और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को घर के अंदर रहने, नदी किनारे और भूस्खलन संभावित ढलानों से दूर रहने और सरकारी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है। अगले 24 घंटे बेहद अहम होंगे।







