उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में अगले 48 घंटे भारी बारिश का अलर्ट, बाढ़ का खतरा मंडराया

By: skymet team | Edited By: skymet team
Aug 5, 2025, 1:45 PM
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यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, फोटो: PTI

अगले दो दिनों में उत्तराखंड के निचले और मध्य पहाड़ी इलाकों के साथ पश्चिमी यूपी के तलहटी और आसपास के मैदानी इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। जिसमें नजीबाबाद में 24 घंटे में 223 मिमी बारिश हुई, जबकि मुरादाबाद ने लगातार दूसरे दिन 100 मिमी से अधिक वर्षाल रिकॉर्ड हुई है। वहीं, बरेली में 68 मिमी, लखीमपुर खीरी में 96 मिमी और शाहजहांपुर में 150 मिमी बारिश हुई है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में बहने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र कौन से होते हैं

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र" (Upper Catchment Area) का मतलब है, नदी या जलाशय के उस हिस्से के आसपास का ऊँचा इलाका जहाँ बारिश या बर्फ पिघलने से पानी इकट्ठा होकर नीचे की ओर बहना शुरू करता है। जैसे गंगा नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके हैं, जहाँ से गंगा में सबसे ज्यादा पानी आता है।

कम दबाव क्षेत्र के अवशेष और मानसून ट्रफ की स्थिति

कम दबाव क्षेत्र के अवशेष के रूप में एक कमजोर परिसंचरण(circulation) उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तराई में स्थित है। 'ब्रेक मानसून' की स्थिति के कारण मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा इन दोनों क्षेत्रों की तराई के साथ खिसक गया है। पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ का गुजरना भी इन मौसम प्रणालियों को और ताकत देगा। अगले 48 घंटों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है, खासकर अगले 24 घंटे बहुत अहम और संवेदनशील रहेंगे।

जोखिम वाले क्षेत्र और सतर्कता की आवश्यकता

उत्तराखंड में जोखिम वाले स्थानों में रुद्रपुर, उधम सिंह नगर, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, उत्तरकाशी (uttarkashi) और पौड़ी गढ़वाल शामिल हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तराई और मैदानी क्षेत्रों में बरेली, पीलीभीत, खीरी, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, रामपुर, बदायूं और आसपास के स्थान संवेदनशील रहेंगे। उत्तराखंड और तराई क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी सावधानी बरतनी होगी। गौरतलब है, अगले 24 घंटे में बारिश सबसे ज्यादा होगी। इसीलिए इन पहाड़ी इलाकों में बहने वाली नदियाँ और झीलें का जलस्तर बारिश रुकने के बाद भी बढ़ा रहता है, जिस कारण हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। इसीलिए किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है।

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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