दूसरे सप्ताह भी नहीं बरसे बादल, सबसे कम बारिश के साथ खत्म हुआ विंटर सीजन

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Feb 27, 2026, 1:15 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • सर्दियों में देशभर में 60% वर्षा की कमी।
  • पूर्वोत्तर राज्यों में 99% तक घाटा।
  • तमिलनाडु में 69% अधिक वर्षा दर्ज।
  • मार्च में प्री-मानसून की धीमी शुरुआत संभव।

फरवरी महीने में हफ्ते दर हफ्ते बारिश की कमी बढ़ती गई, जिसके कारण पूरे सर्दी सीजन में लगभग 60% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। जो पिछले कम से कम एक दशक में शीत ऋतु बारिश की सबसे बड़ी कमी है। गौरतलब है, उत्तर भारत के लिए फरवरी आमतौर पर सर्दियों का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना होता है, लेकिन इस बार यह जनवरी से भी कम बारिश फरवरी में हुई। देश के चारों समरूप क्षेत्रों में अलग-अलग रूप से बारिश की कमी देखी गई, जिसमें पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही है।

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देश के चारों समरूप क्षेत्र क्या हैं

जानकारी के लिए बता दें, देश को मौसम विज्ञान के अनुसार चार बड़े समरूप (Homogeneous) क्षेत्रों में बांटा जाता है। जिसमें पहला है उत्तर-पश्चिम भारत, दूसरा है मध्य भारत, तीसरा भाग है दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और चौथा समरूप पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत है।

इन सभी चारों क्षेत्रों में सामान्य औसत की तुलना में कम बारिश दर्ज की गई। यानी कमी किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे देश में अलग-अलग स्तर पर असर दिखा है। हालांकि, सबसे अधिक गंभीर स्थिति पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में देखने को मिली। इन इलाकों जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बारिश सामान्य से बहुत कम हुई। कई राज्यों में 80% से 99% तक की कमी दर्ज की गई, जो कृषि, जल स्रोतों और पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है।

दूसरे क्षेत्रों में भी कमी रही, लेकिन वह अपेक्षाकृत कम थी। उदाहरण के लिए दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बंगाल की खाड़ी से जुड़े सिस्टम के कारण थोड़ी राहत मिली। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में भी कमी तो रही, लेकिन पूर्वोत्तर जितनी गंभीर नहीं थी।

पूर्वोत्तर में 99% तक कमी, कई राज्यों में सूखा असर

12 से 18 फरवरी 2026 के बीच का सप्ताह लगभग सूखा रहा और इस दौरान 98% बारिश की कमी दर्ज हुई। 19 से 25 फरवरी 2026 के सप्ताह में भी 70% की कमी रही, हालांकि यह पिछले सप्ताह से थोड़ा बेहतर था। बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र(weather system) के कारण दक्षिण भारत में कुछ अच्छी बारिश हुई। लेकिन पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 99% तक वर्षा की कमी दर्ज की गई। बिहार और झारखंड में भी हालात ऐसे ही रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में हल्की राहत मिली है, फिर भी 84% बारिश की कमी बनी हुई है।

दक्षिण भारत को राहत, प्री-मानसून की धीमी शुरुआत

पिछले चार वर्षों से देश में सर्दियों का मौसम संतोषजनक नहीं रहा है। आखिरी बार 2019 और 2022 में सर्दियों की अच्छी बारिश रिकॉर्ड हुई थी। वर्ष 2026 में केवल तमिलनाडु और केरल दो ऐसे उप-विभाग (subdivision) रहे, जहां बेहतर स्थिति रही। वहीं, तमिलनाडु में 69% अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि केरल में केवल 13% बारिश की कमी रही। उत्तर भारत में पंजाब एकमात्र राज्य रहा, जहां केवल 6% की हल्की कमी देखी गई। मार्च के पहले पखवाड़े में प्री-मानसून की गतिविधियाँ धीमी रहने की संभावना है। हालांकि अप्रैल और मई में मौसम गतिविधियाँ रफ्तार पकड़ सकती हैं।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

पूरे देश में इस सीजन में लगभग 60% वर्षा की कमी दर्ज की गई, जो एक दशक में सबसे अधिक है।

पूर्वोत्तर भारत, जहां 99% तक बारिश की कमी दर्ज हुई।

मार्च के पहले आधे हिस्से में गतिविधियाँ धीमी रहेंगी, लेकिन अप्रैल और मई में तेजी आने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है